श्रद्धालुओं का सहारा बने संगम तट पर नम्बर वाले पोल
संगम घाटों के आस-पास श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बिजली के पोल पर बड़े-बड़े होर्डिंग पर मोटे-मोटे अक्षरों में नम्बर लिखे गये हैं। स्नान के दौरान अधिकांश स्नानार्थी अपने परिजनों से बिछड़ जाते हैं। ये पोल उन्ही श्रद्धालुओं के लिए सहारा बने हुए हैं। परिजनों के साथ स्नान करने आए श्रद्धालु संगम तीरे खडे पोल पर नंबर देखकर वहां एक सदस्य के हवाले अपने वस्त्र और सामान रख कर आस्था की डुबकी लगाने जाते हैं और वापसी में उसी नम्बर को देखकर वापस पहुंच जाते हैं।
मेला के दौरान संगम में स्नान करने दूर-दराज से आने वाले स्नानार्थी कपड़े, बैग एवं गठरी आदि घाट पर स्वजन के के साथ छोड़ कर डुबकी लगाने चले जाते हैं। भीड़ होने पर लौटते समय अपने निर्धारित स्थान से भटक जाते हैं और परेशान हो जाते हैं। लेकिन पोल पर लिखे नम्बर के नीचे अपने परिजन के पास वस्त्र रखकर स्नान कर उसी नम्बर पोल पर पहुंचने से किसी प्रकार बिछड़ने का डर नहीं रहता।
संगम तट रात में दूधिया रोशनी में अपनी अद्भुत ही आभा बिखेर रही है। लगातार माइक पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं से खंभों के नंबर देखकर उसके नीचे अपने स्वजन के पास वस्त्र और सामान रखने का अनुरोध लगातार किया जा रहा है जिससे उन्हें भटकने का कोई अंदेशा नहीं रहे। बावजूद इसके बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के भटकते और विलाप करते देखा गया है।
लखीमपुर खीरी की रामकली देवी,सुल्तानपुर के बनवारी और झारखंड के दीनाराम ने बताया कि सभी अपने कुछ परिचित और परिजनों के साथ डुबकी लगाने गए लेकिन कौन किधर सामान के पास हैं लेकिन उन्हें यह पता नहीं हो पा रहा है कि वह कहां जाएं। ठंड से कांप रहे बनवारी, रामकली और दयाराम ने बताया कि उनके पास अब न/न तो कोई वस्त्र है और न/न ही पैसा कि वे अपने घर वापस लौट जाएं। पुलिस ने उन्हे खोया पाया सेन्टर पर भेज कर लाउडस्पीकर पर अनाउंस करवाया जा रहा है।
मेला प्राधिकरण कार्यालय के सामने स्थित खोया-पाया सेंटर पर अपनो से बिछुड़े लोगों की करुण क्रंदन सुनाई पड़ रही है। विलाप कर रहे लोगों के गले से साफ आवाज भी नहीं निकल रही है। मेला क्षेत्र में पुलिस अपनो से भटके लोगों को खोया-पाया केंद्र पर पहुंचने का पूरा प्रयास कर रही है। इसके साथ ही भटके शिविरों को श्रद्धालुओं को उनके शिविर का रास्ता बताने में सहयोग कर रही है।

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