बीआरओ के प्रोजेक्ट हिराक ने 46 वर्ष पूरे किये, कुमाऊं और बस्तर कॉरिडोर को मिली मजबूती
नयी दिल्ली, 15 फरवरी (वार्ता) सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के प्रोजेक्ट हिराक ने रविवार को उत्तराखंड के टनकपुर में अपना 46वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर कुमाऊं क्षेत्र और छत्तीसगढ़ के वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित इलाकों में रणनीतिक संपर्क सुदृढ़ करने में परियोजना की अहम भूमिका का उल्लेख किया गया। बीआरओ के प्रवक्ता के अनुसार, वर्षों में प्रोजेक्ट हिराक ने दुर्गम और सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा मजबूत कर राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक आवागमन को नई दिशा दी है। परियोजना ने कैलाश मानसरोवर सात्रा 2025 के दौरान महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जब पहली बार श्रद्धालु वाहनों से लिपुलेख दर्रे से मात्र 500 मीटर पहले तक पहुंच सके। भारी मानसून और भूस्खलन की चुनौतियों के बावजूद निरंतर सड़क रखरखाव और उन्नयन कार्यों से यात्रा सुगम बनाई गयी। विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के रूप में 15 फरवरी 1980 को स्थापित इस परियोजना ने शुरुआत में भारत कुकिंग कोल लिमिटेड के तहत धनबाद के कोयला क्षेत्रों में संपर्क मार्ग निर्माण का कार्य संभाला। बाद में इसका मुख्यालय नागपुर स्थानांतरित किया गया, जहां महाराष्ट्र के गढ...