कांग्रेस कभी भारत की विरासत का सम्मान नहीं कर सकती: योगी

वाराणसी, 17 जनवरी (वार्ता) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को काशी में कहा कि कुछ लोग काशी की विरासत को हमेशा बदनाम करने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि जब काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण कार्य चल रहा था, तब भी कुछ तत्वों ने साजिशें रचीं। 2019 में कार्य शुरू होने से 2021 तक लगातार विरोध और साजिशें जारी रहीं। उन्होंने यहां तक किया कि मूर्तियां बनाने वाली दुकानों से टूटे हुए मूर्तियों के अवशेष इकट्ठा कर सोशल मीडिया पर वायरल करके बदनाम करने का प्रयास किया।
मुख्यमंत्री ने कहा, “भारत की आस्था को अपमानित करने वाली कांग्रेस कभी भी भारत की विरासत का सम्मान नहीं कर सकती। कांग्रेस लगातार भारत की विरासत का अपमान करती रही है। उदाहरण के लिए, जब द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर के पुनरुद्धार का कार्यक्रम सरदार वल्लभभाई पटेल ने आगे बढ़ाया, तो तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसका विरोध किया। उन्होंने राष्ट्रपति को प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में न जाने के लिए पत्र लिखा। यह भारत की विरासत के अपमान का स्पष्ट उदाहरण है।”
योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि काशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद यह दावा करना कि मंदिर तोड़े गए हैं, सरासर झूठ है। इससे बड़ा सफेद झूठ और कुछ नहीं हो सकता। वास्तव में मंदिरों का पुनरुद्धार किया गया है। पहले जो मंदिर जीर्ण-शीर्ण हालत में थे, उनका जीर्णोद्धार किया गया और वे आज भी उसी स्वरूप में मौजूद हैं।
उन्होंने माता अन्नपूर्णा की मूर्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि लगभग सौ वर्ष पहले माता अन्नपूर्णा की मूर्ति चोरी होकर यूरोप (कनाडा) पहुंच गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से वह मूर्ति वापस काशी लाई गई और बाबा विश्वनाथ धाम में स्थापित की गई। 1947 से 2014 तक कांग्रेस की सरकारें लगभग लगातार रही हैं, लेकिन उन्होंने इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया। उन्हें भारत की विरासत का सम्मान नहीं था और वे विरासत के सम्मान से परहेज करती रहीं।

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