शिव शक्ति मंदिर का वार्षिक उत्सव संपन्न, 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर 108 पार्थिव शिवलिंगों का भव्य महारुद्राभिषेक

गोरखपुर(दुर्गेश मिश्र)। धार्मिक नगरी गोरखपुर में भगवान शिव की भक्ति और शक्ति आराधना का अद्भुत संगम देखने को मिला। रविवार, 8 फरवरी 2026 को शिव शक्ति मंदिर का वार्षिक उत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर हर-हर महादेव के उद्घोष, वैदिक मंत्रोच्चार और भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन कर महादेव बगलामुखी की कृपा प्राप्त की।
वार्षिक उत्सव के अंतर्गत रुद्राभिषेक, दुर्गा सप्तशती पाठ, वैदिक हवन, भजन संध्या एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। प्रातः काल से ही भक्तों की लंबी कतारें मंदिर में दर्शन के लिए लगी रहीं। आचार्यों द्वारा विधिवत मंत्रोच्चार के साथ किए गए अनुष्ठानों से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया। सायंकालीन भजन संध्या में शिव भक्ति से ओतप्रोत भजनों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रियंका सिंह, अर्पिता राव, सुनिधि सिंह, कुणाल तिवारी सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं समाजसेवी उपस्थित रहे। अतिथियों ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे समाज में धार्मिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने वाला बताया।

इसी क्रम में आयोजकों ने आगामी 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि महापर्व पर आयोजित होने वाले भव्य कार्यक्रम की जानकारी भी दी। इस दिन श्री राजराजेश्वरी भगवती माता, बगलामुखी दिव्य पीतांबरा फाउंडेशन, जूही एन्क्लेव, सिक्टौर चौराहा, गोरखपुर में 108 पार्थिव शिवलिंगों का महारुद्राभिषेक आयोजित किया जाएगा। काशी से पधारे 21 विद्वान ब्राह्मण आचार्यों के सान्निध्य में संपूर्ण रात्रि चार प्रहरों में यह महाअनुष्ठान संपन्न होगा।

आचार्यों के अनुसार महाशिवरात्रि वह पावन रात्रि है, जब भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे और यही रात्रि शिव-शक्ति के महासंयोग का प्रतीक मानी जाती है। इस रात्रि में चार प्रहरों में की गई शिव आराधना से प्रथम प्रहर में पापों का क्षय, द्वितीय प्रहर में आयु, बल व स्वास्थ्य की प्राप्ति, तृतीय प्रहर में धन-वैभव एवं कार्य सिद्धि तथा चतुर्थ प्रहर में मोक्ष और आत्मिक शांति का वरदान मिलता है।

आयोजकों ने बताया कि पार्थिव शिवलिंग की पूजा विशेष रूप से मनोकामना सिद्धि, कर्म बंधनों से मुक्ति और जीवन में सुख-शांति की स्थापना के लिए अत्यंत फलदायी मानी गई है। इच्छुक श्रद्धालु यजमान के रूप में रुद्राभिषेक में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ अर्जित कर सकते हैं।

महाशिवरात्रि का यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि समाज को आध्यात्मिकता, साधना और सनातन संस्कृति से जोड़ने का एक महत्त्वपूर्ण प्रयास भी है।

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