पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्य तिथि के मौके पर दिल्ली भाजपा ने आयोजित की स्मृति सभा
नयी दिल्ली, 11 फरवरी (वार्ता) भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष रहे पं. दीनदयाल उपाध्याय की पुण्य तिथि के अवसर पर बुधवार को दिल्ली प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से पं. दीनदयाल उपाध्याय उपवन में स्मृति सभा का आयोजन किया गया।
भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री श्री शिव प्रकाश जी ने दीनदयाल उपाध्याय जी के बलिदान दिवस पर कहा, " आज हमारी पार्टी के सबसे अधिक विधायक, सांसद और स्थानीय निकायों में जनप्रतिनिधि है लेकिन हमारा संगठन जहां से उठकर आज विश्व का सबसे बड़ा संगठन बना है उसके पीछे के संघर्षों को हमें याद रखना चाहिए।" उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी उन सफल व्यक्तित्व में से एक हैं जिन्होंने जनसंघ की नींव रखी।
उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता के पश्चात देश और दुनिया के अंदर राजनीतिक क्षेत्र में तीन विचार- पूंजीवाद, साम्यवाद और समाजवाद बहुत तेजी से अलग-अलग देशों में उभर रहे थे। उसी दौरान भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद इस बात पर चर्चा हो रही थी कि भारत का स्वरुप क्या होगा। इस पर विचार करने के लिए पार्टी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को दायित्व दिया और लंबे विचार विमर्श के बाद उन्होंने जो विचार दिया वह है- एकात्म मानववाद जो आज भारत को एक ओजस्वी राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि पं. उपाध्याय की आकस्मिक मृत्यु ने जरुर पूरे देश में एक सनसनी जरुर फैलाई लेकिन उन्होंने एक विधान एक संविधान के विचार को मजबूत करने पर जोर दिया और इसके पीछे संगठन की शक्ति थी। 1952-68 तक जनसंघ में राष्ट्र व्यापी एक ढ़ांचा तैयार किया। उनके अथक प्रयास और यह पं. दीनदयाल उपाध्याय के पुरुषार्थ का परिणाम है कि 1964 आते-आते कांग्रेस के विकल्प के रुप में भारतीय जनसंघ स्थापित हो गया और दिल्ली नगर निगम के चुनाव जीतकर पहली बार किसी निकाय में सत्ता में आई।
वहीं, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर राष्ट्र उन्हें एक ऐसे विचारक और कर्मयोगी के रूप में स्मरण कर रहा है, जिन्होंने भारतीय राजनीति को सत्ता की नहीं, बल्कि सेवा की दिशा दी। पंदीनदयाल उपाध्याय के पुरुषार्थ का परिणाम है कि 1964 आते-आते कांग्रेस का विकल्प के रुप में भारतीय जनसंघ स्थापित हो गया और दिल्ली नगर निगम के चुनाव जीतकर पहली बार किसी निकाय में सत्ता में आए।
उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित "एकात्म मानववाद" का सिद्धांत आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था। उनका विचार था कि समाज, अर्थव्यवस्था और राजनीति को अलग-अलग खांचों में नहीं देखा जा सकता। मानव जीवन की भौतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक आवश्यकताओं का संतुलित विकास ही सच्ची प्रगति है।
उन्होंने अंत्योदय का विचार देकर यह स्पष्ट किया कि राष्ट्र की उन्नति का पैमाना वही होगा, जहाँ समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति भी सम्मानजनक जीवन जी सके। गरीब, किसान, श्रमिक, महिला और वंचित वर्ग का सशक्तिकरण उनके चिंतन का मूल आधार था।
उन्होंने कहा, "आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चल रही जनकल्याणकारी योजनाएँ—गरीब कल्याण, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, किसान सम्मान निधि और आत्मनिर्भर भारत पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों की ही आधुनिक अभिव्यक्ति हैं। यह शासन व्यवस्था उनके सपनों के भारत को साकार करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है।"
इस अवसर पर श्री शिवप्रकाश और श्री सचदेवा, के अलावा दिल्ली विधानसभाध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता, सांसद मनोज तिवारी, सांसद योगेन्द्र चंदोलिया, दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष आदेश गुप्ता, प्रदेश महामंत्री विष्णु मित्तल के साथ विधायक अजय महावर, सभी 14 जिलाध्यक्षों के साथ दिल्ली के उपमहापौर श्री जयभगवान यादव, स्थाई समिति अध्यक्ष श्रीमती सत्या शर्मा और अन्य लोग सम्मलित हुए।

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