डिजिटल युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए आईसीएआई ने जारी किया सूचना प्रणाली अंकेक्षण मानक
नयी दिल्ली, 18 फरवरी (वार्ता) भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) ने डिजिटल युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए सूचना प्रणाली अंकेक्षण मानक जारी करने की घोषणा की है, जो शासन, जोखिम, नियंत्रण और अनुपालन पर आधारित है। यह इसी महीने से प्रभावी होगा।
संस्थान अध्यक्ष प्रसन्ना कुमार डी ने बुधवार को यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए बताया कि आईसीएआई ऐसा व्यापक ढांचा तैयार करने वाला दुनिया का पहला लेखा निकाय है। उन्होंने बताया कि आईसीएआई कुल 11 लेखा मानक और तीन समग्र दस्तावेज जारी कर रहा है। ये मानक फरवरी 2026 से ही लागू होंगे। उन्होंने बताया कि शुरुआती छह महीनों तक ये सिफारेिशें रहेंगी, लेकिन आगे चलकर इन्हें सीए सदस्यों के लिए अनिवार्य बनाया जाएगा।श्री प्रसन्ना ने बताया कि अब तक सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अंकेक्षण कई जगह अलग-अलग तरीके से किया जाता था, लेकिन सूचना प्रणाली लेखापरीक्षा मानक के आने के बाद पूरी प्रणाली एक तय ढांचे में काम करेगी।
उन्होंने बताया कि इसमें एश्योरेंस, सहमत प्रक्रियाएं और सलाहकार सेवाओं को अलग-अलग परिभाषित किया गया है ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे। इससे डिजिटल अंकेक्षण को एक औपचारिक और अनुशासित पहचान मिलेगी। आईसीएआई के अध्यक्ष ने बताया कि यह डिजिटल युग में अंकेक्षण का नया ढांचा होगा। सबसे खास बात यह है कि इन मानकों में साइबर सुरक्षा और डिजिटल डेटा सुरक्षा को पहली बार इतनी स्पष्टता से शामिल किया गया है। अब अंकेक्षण सिर्फ खातों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि कंपनी की आईटी प्रणाली कितनी सुरक्षित है, डेटा कितनी मजबूती से संरक्षित है और साइबर खतरों से बचाव के इंतजाम कितने प्रभावी हैं।
उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में ज्यादातर वित्तीय आंकड़े ईआरपी प्रणाली, क्लाउड और स्वचालित प्रक्रियाओं के जरिए तैयार होते हैं, इसलिए मजबूत आईटी नियंत्रण बेहद जरूरी हो गए हैं। उन्होंने बताया कि पहली बार औपचारिक सूचना प्रणाली अंकेक्षण ढांचा स्थापित किया गया है। इसमें आईटी अंकेक्षण करने के लिए स्पष्ट बुनियादी सिद्धांत तय किए गए हैं। इससे इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स ऑडिट को एक औपचारिक, वैश्विक स्तर की एश्योरेंस अनुशासन का दर्जा मिलेगा।
श्री प्रसन्ना ने बताया कि संस्थान का यह फ्रेमवर्क चार मुख्य स्तंभों शासन, जोखिम, नियंत्रण और अनुपालन पर आधारित है। इन मानकों में विशेष रूप से आईटी शासन , जोखिम प्रबंधन, आंतरिक नियंत्रण, साइबर सुरक्षा और डिजिटल डेटा सुरक्षा नियंत्रण शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि पहली बार किसी लेखा निकाय द्वारा साइबर सुरक्षा और डिजिटल डेटा संरक्षण पर विशिष्ट अंकेक्षण मानक विकसित किए गए हैं। इससे ऑडिट रिपोर्ट अधिक प्रासंगिक, उपयोगी और निर्णय लेने में सहायक बनेगी।

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