समाज को जोड़ने से ही देश मजबूत होगा: डॉ. मोहन भागवत
गोरखपुर, 15 फरवरी (वार्ता)। “भारत स्वार्थ नहीं देखता, संकट में पूरी दुनिया की सहायता करता है, इसलिए भारत सद्भावना का केंद्र है,” यह कहना है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का। उन्होंने यह बात गोरखपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सामाजिक सद्भाव बैठक को संबोधित करते हुए कही।
संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर गोरखपुर स्थित तारामंडल के बाबा गम्भीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित इस बैठक में विभिन्न जाति, समाज और पंथों के प्रमुख एवं प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सरसंघचालक ने कहा कि समाज वही है, जिसमें परस्पर जुड़ाव हो। यदि समाज में सद्भावना नहीं होगी तो केवल कानून और पुलिस के सहारे समाज नहीं चल सकता।डॉ. भागवत ने कहा कि संघ के 100 वर्ष पूरे होना उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का अवसर है। उन्होंने आग्रह किया कि ब्लॉक स्तर पर वर्ष में नियमित रूप से सामाजिक बैठकें आयोजित हों। उन्होंने कहा कि अपनी जाति और समाज की चिंता करना अच्छी बात है, लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हम एक बड़े हिंदू समाज का हिस्सा हैं और उसके लिए क्या कर रहे हैं, इस पर भी विचार आवश्यक है।
उन्होंने भारतीय संस्कृति की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत में मनुष्य-मनुष्य का संबंध सौदे का नहीं, बल्कि अपनेपन का है। विविध वेशभूषा, रंग-रूप और परंपराएं यहां अलगाव नहीं, बल्कि एकता का आधार हैं। भारत को माता मानने का भाव और एक ही चैतन्य का विश्वास समाज को जोड़ता है।
बैठक में विभिन्न जाति और पंथों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार और समाज में किए जा रहे प्रेरक कार्यों के अनुभव साझा किए। सरसंघचालक ने कहा कि समाज को मजबूत करने की जिम्मेदारी समाज की है और संघ इसमें सहयोगी की भूमिका निभाता है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों के साथ पंगत में भोजन किया और भारत माता की आरती के साथ बैठक का समापन हुआ।
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