निमेसुलाइड पर सख्ती: 100 एमजी से अधिक की दवा अब न बनेगी, न बिकेगी, न बंटेगी
लखनऊ 31 दिसम्बर (वार्ता) साल के अंत में केंद्र सरकार ने जनस्वास्थ्य के हित में बड़ा कदम उठाते हुए निमेसुलाइड दवा को लेकर सख्त फैसला लिया है। स्टेट फार्मेसी काउंसिल उत्तर प्रदेश के पूर्व चेयरमैन एवं फार्मेसिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष सुनील यादव ने कहा कि अब 100 मि.ग्रा. से अधिक मात्रा में मुंह से ली जाने वाली (ओरल) निमेसुलाइड दवाओं का निर्माण, बिक्री और वितरण पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह निर्णय जनस्वास्थ्य की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण और समयोचित कदम है।
सुनील यादव के अनुसार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने समय-समय पर निमेसुलाइड के उपयोग को लेकर जरूरी नियामक फैसले लिए हैं। 29 दिसंबर को जारी नई अधिसूचना के तहत ड्रग एंड कास्मेटिक एक्ट , 1940 की धारा 26ए के अंतर्गत, ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड से परामर्श के बाद यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। इसके अनुसार तत्काल राहत दवा मात्रा में 100 मि.ग्रा. से अधिक मात्रा वाली सभी ओरल निमेसुलाइड दवाओं पर रोक रहेगी।उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 में ही सरकार ने 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों में निमेसुलाइड के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। उस समय यह आशंका सामने आई थी कि बच्चों में इस दवा के इस्तेमाल से लीवर को गंभीर नुकसान (हेपेटोटॉक्सिसिटी) हो सकता है। चूंकि बच्चों के लिए पैरासिटामोल और इबुप्रोफेन जैसी सुरक्षित वैकल्पिक दवाएं उपलब्ध हैं, इसलिए बाल स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई थी। अब सरकार ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए उच्च मात्रा वाली दवाओं को सभी आयु वर्गों के लिए प्रतिबंधित कर दिया है।
फार्मेसिस्ट फेडरेशन का कहना है कि यह फैसला औषधि सुरक्षा, दवाओं के तर्कसंगत उपयोग और नागरिकों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर है। संगठन ने सभी दवा निर्माताओं, थोक और खुदरा विक्रेताओं से आदेश का सख्ती से पालन करने की अपील की है।

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