सेमीकंडक्टर डिजाइन के लिए देश में चार साल में 85,000 इंजीनियर प्रशिक्षित
नयी दिल्ली, 07 मार्च (वार्ता) भारत ने सेमीकंडक्टर डिजाइन के काम के लिए चार वर्ष में 85000 से अधिक इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया है।रेलवे, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी देते हुए कहा कि यह उपलब्धि इस उद्योग के लिए कुशल मानव संसाधन की आपूर्ति के 10 वर्षीय लक्ष्य की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति है।
देश के 315 शैक्षणिक संस्थानों में जहां इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन के डिजाइन के लिए जरूरी टूल उपलब्ध कराये गये हैं। सरकार का कहना है कि भारत में इस क्षेत्र में आने वाले समय में लगभग 20 लाख कुशल पेशेवरों की मांग उत्पन्न होगी।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय की शनिवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह प्रगति भारत सरकार की प्रतिभा विकास को प्राथमिकता देने वाली पहल के तहत प्रशिक्षण, कौशल उन्नयन और कार्यबल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से हासिल की गई है, जो भारत सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के चिप्स टू स्टार्टअप्स (सी2एस) कार्यक्रम का हिस्सा है।
विज्ञप्ति में श्री वैष्णव के हवाले से कहा गया है कि प्रशिक्षण के लिए देश के 315 शैक्षणिक संस्थानों में सिनॉप्सिस, कैडेंस डिजाइन सिस्टम्स, सीमेंस, रेनेसा इलेक्ट्रॉनिक्स, एनसिस और एडवांस माइक्रो डिवाइसेस (एएमडी) द्वारा समर्थित विश्व-स्तरीय इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (ईडीए) के लिए जरूरी टूल उपलब्ध कराए गए हैं। इनकी मदद से छात्र सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन करने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर रहे हैं।
इन चिप्स का निर्माण और परीक्षण सेमीकंडक्टर लैबोरेटरी (एससीएल) मोहाली में किया जा रहा है, जिससे छात्रों को डिजाइन से लेकर फेब्रिकेशन, पैकेजिंग और टेस्टिंग तक पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत की यह पहल अब दुनिया का सबसे बड़ा ओपन-एक्सेस ईडीए प्रोग्राम बन चुकी है। इसके तहत इलेक्ट्रानिक्स डिजाइन टूल का अब तक 1.85 करोड़ घंटे से अधिक का उपयोग किया जा चुका है और यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
श्री वैष्णव ने बताया कि आज असम से गुजरात और कश्मीर से कन्याकुमारी तक देशभर के शैक्षणिक संस्थानों के छात्र सेमीकंडक्टर डिजाइन में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। यह भारत की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
वैश्विक उद्योग की आवश्यकताओं पर प्रकाश डालते हुए श्री वैष्णव ने कहा कि सेमीकंडक्टर उद्योग का आकार वर्तमान 800–900 अरब डॉलर से बढ़कर 2 लाख करोड़ डॉलर होने की संभावना है। इसके साथ ही लगभग 20 लाख कुशल पेशेवरों की मांग उत्पन्न होगी, जो भारत के युवाओं के लिए रोजगार के विशाल अवसर प्रदान करेगी।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि आईएसएम 2.0 के तहत इस कार्यक्रम को 315 से बढ़ाकर 500 शैक्षणिक संस्थानों तक विस्तारित किया जाएगा। इससे देश के प्रत्येक राज्य में सेमीकंडक्टर डिजाइन, फेब्रिकेशन, पैकेजिंग और टेस्टिंग में प्रशिक्षित प्रतिभाओं का मजबूत और निरंतर पूल तैयार होगा।
श्री वैष्णव ने दोहराया कि भारत सरकार सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक मजबूत और आत्मनिर्भर इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रतिभा विकास, अवसंरचना निर्माण और उद्योग सहयोग के माध्यम से आईएसएम 2.0 के तहत भारत का लक्ष्य खुद को एक वैश्विक सेमीकंडक्टर हब के रूप में स्थापित करना है।

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