पश्चिम एशिया घटनाक्रम पर भारत ने जतायी चिंता,बातचीत से जल्द समाधान पर दिया जोर


नयी दिल्ली 03 फरवरी (वार्ता) पश्चिम एशिया में स्थिति के निरंतर बिगड़ने और बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने के मद्देनजर भारत ने सभी संबद्ध पक्षों से बातचीत और कूटनीति से समस्या का जल्द समाधान निकालने का एक बार फिर आह्वान किया है। भारत ने कहा है कि निकट पड़ोसी होने के नाते क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता से उसके महत्वपूर्ण हित जुड़े हुए हैं , इस वजह से भी वहां का घटनाक्रम बड़ी चिंता का विषय है।

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने मंगलवार को ताजा स्थिति पर वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि पश्चिम एशियाई देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों की मौजूदगी और उस क्षेत्र से भारत के आर्थिक हितों के जुड़े होने से इन हालातों को नजरंदाज नहीं किया जा सकता।
वक्तव्य में कहा गया है कि हाल के दिनों में इस संघर्ष में तेजी आयी है और इसका अन्य देशों तक विस्तार हुआ है। इससे विनाश और जनहानि बढ़ी है तथा सामान्य जीवन और आर्थिक गतिविधियां ठप हो गई हैं। भारत का मानना है कि क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता में महत्वपूर्ण हित रखने वाले निकटवर्ती पड़ोसी के रूप में ये घटनाक्रम गहरी चिंता उत्पन्न करते हैं।
प्रवक्ता ने कहा कि इस पृष्ठभूमि में भारत समस्या के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का अपना आह्वान दृढ़ता से दोहराता है। उन्होंने कहा," हम संघर्ष की शीघ्र समाप्ति के पक्ष में स्पष्ट रूप से अपनी आवाज उठाते हैं। पहले ही अनेक बहुमूल्य जीवन दुखद रूप से नष्ट हो चुके हैं और इस संबंध में हम गहरा शोक व्यक्त करते हैं।"
खाड़ी क्षेत्रों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिकों की मौजूदगी का उल्लेख करते हुए प्रवक्ता ने उनकी सुरक्षा और कल्याण को भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। भारत ने साफ कहा है कि वह अपने नागरिकों के हितों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने वाले किसी भी घटनाक्रम के प्रति उदासीन नहीं रह सकता। भारत के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाएँ भी इसी भौगोलिक क्षेत्र से होकर गुजरती हैं और किसी भी बड़े व्यवधान के भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर परिणाम होते हैं।
प्रवक्ता ने कहा है कि वैश्विक कार्यबल में महत्वपूर्ण भागीदारी वाले देश के रूप में भारत व्यापारिक जहाजों पर हमलों का दृढ़ता से विरोध करता है। पिछले कुछ दिनों में ऐसे हमलों के परिणामस्वरूप कुछ भारतीय नागरिकों की मृत्यु हुई है या वे लापता हैं।
वक्तव्य में कहा गया है कि प्रभावित देशों में स्थित भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास भारतीय नागरिकों और सामुदायिक संगठनों के साथ निरंतर संपर्क में हैं तथा आवश्यकता अनुसार नियमित परामर्श जारी कर रहे हैं। संघर्ष के कारण फंसे हुए लोगों को हर संभव सहायता भी प्रदान की गई है। दूतावास और वाणिज्य दूतावास इस संघर्ष से संबंधित विभिन्न वाणिज्यिक एवं कांसुलर मामलों के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे।
प्रवक्ता ने कहा कि भारत इस क्षेत्र की सरकारों तथा अन्य प्रमुख साझेदारों के साथ संपर्क में हैं। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने अपने समकक्षों के साथ इस विषय पर चर्चा की है।
उन्होंने कहा कि सरकार निरंतर बदल रही स्थिति पर निकट दृष्टि बनाए रखेगी और राष्ट्रीय हित में आवश्यक निर्णय लेती रहेगी।
उल्लेखनीय है कि भारत ने ईरान और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष के आरंभ होने पर 28 फरवरी को गहरी चिंता व्यक्त की थी। उस समय भी भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ाने से बचने और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया था। दुर्भाग्यवश, रमज़ान के पवित्र महीने में इस क्षेत्र की स्थिति लगातार और गंभीर रूप से बिगड़ गई है।

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