ओम बिरला ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से संसद की गरिमा बनाए रखने और सहयोग की अपील की
नयी दिल्ली, 15 मार्च (वार्ता) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को एक पत्र लिखकर लोकसभा में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक परंपराओं को बनाए रखने के लिए सहयोग की अपील की है।श्री बिरला ने इस संबंध में सभी दलों के नेताओं को संबोधित एक सार्वजनिक पत्र में संसद के भीतर और परिसर में बढ़ती अव्यवस्था और आचरण को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि भारत की संसद देश के 140 करोड़ नागरिकों की आकांक्षाओं और उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करने वाली सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है। उन्होंने कहा कि संसद में उठने वाली हर आवाज करोड़ों लोगों की भावनाओं और अपेक्षाओं को व्यक्त करती है। इसलिए संसद भवन परिसर सभी के लिए एक पवित्र स्थान है, जहां विचार-विमर्श, संवाद और सहमति-असहमति की परंपरा के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखा जाना चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि हाल के समय में कुछ सदस्यों के व्यवहार और गतिविधियों के कारण संसद की गरिमा और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचने की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि संसद परिसर के भीतर और बाहर जिस प्रकार के बैनर, प्लेकार्ड और नारेबाजी का प्रदर्शन किया जा रहा है तथा जिस तरह की भाषा और व्यवहार देखने को मिल रहा है, यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को सुधारने के लिए सभी राजनीतिक दलों और सांसदों को सामूहिक रूप से गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संसद में हमेशा से गरिमापूर्ण चर्चा और संवाद की समृद्ध परंपरा रही है, जिसे बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।
श्री बिरला ने पत्र में यह भी कहा कि जब-जब संसद में आचरण के स्तर को लेकर चिंता जताई गई है, तब-तब सभी दलों और हितधारकों के बीच बैठकें और चर्चा आयोजित कर समाधान खोजने की कोशिश की गई है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अब भी सभी दलों को मिलकर संसद की प्रतिष्ठा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मर्यादा को मजबूत करने के लिए प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है और इसके सदस्यों पर देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा बनाए रखने की विशेष जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी दलों के नेताओं से अपील की कि वे संसद की गरिमा बनाए रखने में सहयोग करें और यह सुनिश्चित करें कि सदन के भीतर संवाद, तर्क और स्वस्थ बहस की परंपरा को आगे बढ़ाया जाए।
श्री बिरला ने उम्मीद जताई कि सभी राजनीतिक दल इस विषय की गंभीरता को समझते हुए संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सकारात्मक सहयोग देंगे।
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