कोलकाता में मतदाता सूची बदलाव को लेकर तृणमूल और चुनाव आयोग में तीखी नोकझोंक
कोलकाता, 09 मार्च (वार्ता) पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में सोमवार को चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच हुई बैठक के दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर आयोग और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच तीखी बहस हुई ।बैठक के बाद तृणमूल प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्यों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बर्ताव पर गहरी नाराज़गी जताई और आरोप लगाया कि उन्होंने उन्हें अपनी बात पूरी तरह से रखने की इजाज़त नहीं दी।
तृणमूल की वरिष्ठ नेता एवं राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने दावा किया कि उनसे चर्चा के दौरान अपनी आवाज़ ऊंची न करने के लिए कहा गया। उन्होंने कहा, "मैं एक महिला हूँ और उन्होंने मुझसे कहा, 'चिल्लाओ मत'। असल में उनके मन में महिलाओं के लिए कोई सम्मान नहीं है। इसीलिए महिलाओं के नाम भी मतदाता सूची से काटे जा रहे हैं।अगर मेरा नाम नहीं है, तो इसे साबित करना आपकी ज़िम्मेदारी है। मुझे कतार में क्यों खड़ा होना चाहिए? महिलाओं पर चिल्लाना आपका काम नहीं है।"
तृणमूल के प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त उनकी बातें सुनने को तैयार नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया, "वह किसी की बात नहीं सुनना चाहते। वह खुद बोलते रहे और जब हमने बोलने की कोशिश की, तो उन्होंने अपनी आवाज़ ऊंची कर ली। ऐसा लगता है कि आयोग इसलिए नाराज़ है क्योंकि हमने उच्चतम न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया।"
आयोग के साथ ही बैठक में तृणमूल की ओर से श्री फिरहाद हकीम, श्रीमती भट्टाचार्य और राज्यसभा उम्मीदवार राजीव कुमार शामिल थे। श्री हकीम ने एसआईआर प्रक्रिया की आलोचना की और आयोग पर घुसपैठ के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कहानी से प्रभावित होकर गलत तरीका अपनाने का आरोप लगाया।
श्री हकीम ने कहा, "भाजपा ने यह प्रभाव बनाया है कि यह राज्य रोहिंग्या और घुसपैठियों से भरा है, और आयोग ने अपनी नीति उसी हिसाब से बनाई है।लेकिन इस प्रक्रिया के दो महीनों में आपको इसका कोई सबूत नहीं मिला है। इसके बजाय भारतीय नागरिकों को परेशान किया गया है। इस प्रक्रिया से आम लोगों को काफी मुश्किल हुई है। सैकड़ों मौतें हुई हैं और बहुत सारे लोग बीमारियों की चपेट में आए। इसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा? लोग अपना काम छोड़कर सिर्फ़ अपनी नागरिकता साबित करने के लिए लंबी लाइनों में खड़े हो रहे हैं। भाजपा की बात मानकर बनाई गई यह नीति बनायी गयी। है।"
श्री हकीम ने कहा कि पार्टी की सबसे बड़ी चिंता यह पक्का करना है कि असली वोटर अपने अधिकारों से वंचित न रहें। उन्होंने कहा, "हमारा बस यही आग्रह है कि किसी भी भारतीय नागरिक को वंचित न किया जाए।" एसआईआर प्रक्रिया को लेकर पार्टी के उच्चतम न्यायालय जाने के सवाल पर भट्टाचार्य ने इस कदम का बचाव किया।
उन्होंने कहा, "जब भी हमने एसआईआर का मुद्दा उठाया, तो उन्होंने कहा कि मामला उच्चतम न्यायालय में है। फिर हमें बैठक के लिए क्यों बुलाया? अगर आप हमें बुलाते हैं, तो आपको हमारी बात सुननी चाहिए।क्या हमारा उच्चतम न्यायालय जाना गलत था? हमने सही किया। लोगों की सुरक्षा हमारी ज़िम्मेदारी है।"
इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि तृणमूल चुनाव को कितने चरण में कराना चाहती है, तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि बैठक का मकसद मतदान के चरण की संख्या पर चर्चा करना नहीं था। हालांकि, हकीम ने इस मौके का इस्तेमाल भारतीय जनता पार्टी पर राजनीतिक हमला करने के लिए किया और कहा, "भाजपा राज्य में अपनी ज़मीन खो चुकी है। वे मासूम लोगों को एसआईआर कतारों में खड़ा करके बंगाल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस वजह से कई मौतें हुई हैं।"

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