पॉलिएस्टर बांझपन से लेकर उम्र बढ़ने तक, एक मूक जैविक खतरा बनता जा रहा है


प्रयागराज, (दिनेश तिवारी) प्रख्यात वैज्ञानिक और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. अजय कुमार सोनकर ने सचेत करते हुए कहा है कि पॉलिएस्टर और अन्य सिंथेटिक वस्त्र एक छिपे हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में उभर रहे हैं, जो मानव प्रजनन क्षमता को नुकसान पहुंचाने, उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज करने और कई पुरानी बीमारियों को जन्म देने में सक्षम हैं।


     डॉ. अजय ने प्रेस को बताया कि हालांकि पॉलिएस्टर को आमतौर पर हानिरहित और सुविधाजनक कपड़ा माना जाता है, लेकिन वैज्ञानिक प्रमाण अब संकेत देते हैं कि यह एक धीमे जैविक विष की तरह व्यवहार करता है। “पॉलिएस्टर अब केवल एक वस्त्र सामग्री नहीं रह गया है, यह धीरे-धीरे एक अदृश्य अंतःस्रावी विघ्न कर्ता के रूप में कार्य कर रहा है, जो मानव शरीर की संपूर्ण हार्मोनल प्रणाली को बाधित कर रहा है।”


     प्रसिद्ध वैज्ञानिक ने खुलासा किया है कि कई प्रायोगिक अध्ययनों ने पॉलिएस्टर के संपर्क में आने के प्रजनन संबंधी खतरनाक प्रभावों को दर्शाया है। ऐसे ही एक अध्ययन में, पॉलिएस्टर के कपड़े पहनने वाली लगभग 75 प्रतिशत मादा कुत्ते गर्भधारण करने में विफल रहीं, जिसका कारण प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के स्तर में भारी कमी थी।


   प्रोजेस्टेरोन, अंडोत्सर्ग, गर्भधारण, गर्भावस्था को बनाए रखने और भ्रूण के विकास के लिए केंद्रीय हार्मोन है। जब इसका स्तर गिर जाता है, तो बांझपन अपरिहार्य हो जाता है। उन्होंने कहा कि पॉलिएस्टर में थैलेट, बिस्फेनॉल, एंटीमनी यौगिक और माइक्रोप्लास्टिक अवशेष जैसे अंतःस्रावी तंत्र को बाधित करने वाले रसायन होते हैं, जो सीधे हार्मोनल संकेतों में हस्तक्षेप करते हैं, जिससे शुक्राणुओं की संख्या और गतिशीलता में कमी आती है, महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन होता है, अनियमित अंडोत्सर्ग होता है, गर्भपात की संख्या बढ़ती है और दीर्घकालिक प्रजनन विफलता होती है। यही बढ़ती  विफलता बांझपन की समस्या का कारण है।


    डॉ. अजय ने बताया कि पॉलिएस्टर के कारण होने वाला अंतःस्रावी विकार विशेष रूप से बुजुर्ग व्यक्तियों के लिए खतरनाक है, जिनके हार्मोनल भंडार, विषहरण क्षमता और प्रतिरक्षा शक्ति पहले से ही कमजोर होती है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों में अंतःस्रावी विकार वृद्धावस्था और रोग को बढ़ाने का काम करते हैं।


    डॉक्टर सोनकर ने खुलासा किया कि पॉलिएस्टर से जुड़े रसायनों के लगातार संपर्क में रहने से संज्ञानात्मक क्षमता में तेजी से गिरावट, मनोभ्रंश और अल्जाइमर रोग, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और स्ट्रोक हो सकते हैं। इसके अलावा, गंभीर प्रतिरक्षा दमन, दीर्घकालिक सूजन, ऑस्टियोपोरोसिस, मांसपेशियों का क्षय, दुर्बलता और फ्रैक्चर, हार्मोन संबंधी कैंसर, स्तन, प्रोस्टेट, थायरॉइड और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर भी हो सकते हैं।


  प्रसिद्ध वैज्ञानिक ने आगे कहा कि पॉलिएस्टर के कपड़े लगातार सूक्ष्म प्लास्टिक रेशे छोड़ते हैं, जो सांस के साथ शरीर में चले जाते हैं और त्वचा के माध्यम से अवशोषित हो जाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि मनुष्य अनजाने में खुद को प्लास्टिक आधारित जैविक प्रयोग में बदल रहा है। डॉ. अजय ने कहा कि पॉलिएस्टर के कारण होने वाला अंतःस्रावी तंत्र का विघटन कोई अलग-थलग समस्या नहीं है, बल्कि एक वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल है जो बांझपन की बढ़ती दर में योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा, "यदि तत्काल सुधारात्मक उपाय नहीं किए गए, तो मानवता एक मूक जैविक आपदा का सामना कर सकती है।"

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