गोवंश आधारित खेती से कृषि लागत घटाने पर योगी सरकार का जोर
गोरखपुर 16 मार्च (वार्ता) जन स्वास्थ्य की रक्षा के साथ ही मिट्टी की सेहत को मजबूत रखते हुए कृषि लागत को कम करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार गो.आधारित खेती के अन्नदाता किसानों को प्रोत्साहित कर रही है।खेती की लागत कम होने का सीधा अर्थ है, किसानों की आय में वृद्धि। गो.आधारित खेती के लिए सरकार, किसानों को तीन वर्ष तक अनुदान भी दे रही है। परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत गोरखपुर में 20 क्लस्टर बनाकर 400 हेक्टेयर ;करीब 900 एकड़ में जैविक खेती की शुरुआत कर दी गई है।
योगी सरकार ने रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों पर किसानों की निर्भरता कम करने के लिए गो.आधारित प्राकृतिक खेती को एक अभियान का रूप दिया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य खेती की लागत को न्यूनतम करना और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखना है। इसके लिए परंपरागत कृषि विकास योजना के जरिये गोरखपुर में भी गो.आधारित खेती को क्लस्टर मॉडल के आधार पर विस्तार दिया जा रहा है।
प्रदेश के गोरखपुर के दो विकास खंडों ब्रह्मपुर और सरदारनगर में कुल 20 क्लस्टर बनाए गए हैं। ब्रह्मपुर ब्लॉक में 10 क्लस्टर बनाकर 216 तथा सरदारनगर ब्लॉक में इतने ही क्लस्टर से 203 किसानों ;कुल 419 किसान को जैविक खेती करने के लिए प्रेरित किया गया है। इन किसानों को तीन वर्ष तक सरकार की तरफ से प्रोत्साहन अनुदान भी दिया जाएगा।
गोरखपुर में कृषि विभाग के उप निदेशक धनंजय सिंह के अनुसार परंपरागत कृषि योजना में क्लस्टर से जुड़कर जैविक खेती करने वालों को पहले वर्ष 4800 रुपये प्रति एकड़ की दर से अनुदान देने की व्यवस्था है। दूसरे वर्ष अनुदान की दर 4000 रुपये प्रति एकड़ और तीसरे वर्ष 3600 रुपये प्रति एकड़ होगी।
योजना से आच्छादित होकर जैविक खेती करने वाले किसानों को प्रशिक्षण के साथ ही कृषि विभाग की तरफ से जैविक बीज उपलब्ध कराने, बीजामृत, जीवामृत, पंचगव्य, हरी खाद, लिक्विड बायो फर्टिलाइजर, वेस्ट डीकम्पोजर, प्राकृतिक कीटनाशक का प्रबंध करने में सहायता भी दी जाती है।
ब्रह्मपुर ब्लॉक में आकिब जावेद फार्मर प्रोडयूसर्स कंपनी के संचालक आकिब जावेद बताते हैं कि रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जीवामृत, घनजीवामृत और वर्मीकम्पोस्ट जैसे जैविक विकल्पों को अपनाकर किसान प्रति एकड़ दस हजार से बारह हजार रुपये तक की बचत कर रहे हैं।
कैंसर, उच्च रक्तचाप, मधुमेह जैसी बीमारियों के बढ़ते प्रकोप तथा वैश्विक महामारी कोरोना के बाद पूरी दुनिया स्वास्थ्य के प्रति बढ़ी जागरूकता के चलते बाजार में .टॉक्सिन फ्री. जैविक उपज की मांग तेजी से बढ़ी है। इससे जैविक खेती करने वाले किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल रहा है।
उप निदेशक (कृषि) धनंजय सिंह कहते हैं कि गो.आधारित खेती न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि मिट्टी की पोषकता और जन स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह काफी महत्वपूर्ण है। इसे अपनाने में लागत में कमी आने से किसानों का मुनाफा भी बढ़ना स्वाभाविक है।
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