अक्षय तृतीया पर दान-दक्षिणा का है विशेष महत्व: पंडित बृजेश पाण्डेय
गोरखपुर(दुर्गेश मिश्र)। श्री हनुमत् ज्योतिष सेवा संघ के संस्थापक व विद्वत् जनकल्याण समिति के महामंत्री पं बृजेश पाण्डेय ज्योतिषाचार्य ने बताया की अक्षय तृतीया को लेकर जनमानस मे उपजी भ्रांतियों को देखते हुए काशी से प्रकाशित पंचागों व निर्णय सिंधु, धर्मसिंधु के आधार पर उदया तिथि मे अक्षय तृतीया पर्व मनाया जायेगा। जो कल दिनांक 20 अप्रैल दिन सोमवार को है। बैशाख शुक्लपक्ष तृतीया तिथि आज 19 अप्रैल दिन रविवार को दिन मे दोपहर 1 बजकर 1 मिनट से लग जा रहा है तथा दूसरे दिन 20 अप्रैल को दिन मे 10 बजकर 40 मिनट तक है। इसलिए कल 20 अप्रैल को उदयातिथि मे अक्षय तृतीया पर्व मनाना श्रेयष्कर होगा। इस दिन कृतिका नक्षत्र प्रातः 7 बजकर 36 मिनट तक ही है तत्पश्चात रोहिणी नक्षत्र लग जा रही है। सौभाग्य योग,गर करण,वृष रशि कि चंद्रमा मेष राशि का सूर्य एवं मिथुन राशि का बृहस्पति,मीन राशि का शनि मंगल बुध एवं वृष राशि का शुक्र तथा कुंभ राशि का राहू, सिंह राशि के केतु का अद्भुत संयोग बहुत ही पुण्यदायिनी है। इसदिन स्वर्ण दान करना,सप्तधान्य,तुलादान,वस्त्रदान एवं नाना विधि प्रकार से दान करने से अक्षय पुण्य फल की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्य ने यह भी बताया की अक्षय तृतीया के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर समुद्र व गंगा स्नान करके और शान्त चित्त होकर भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने का प्रावधान है। नैवेद्य में जौ व गेहूँ का सत्तू,ककड़ी और चने की दाल अर्पित किया जाना विशेष लाभदायक मना जाता है। तत्पश्चात फल,फूल,पात्र तथा वस्त्र आदि दान करके ब्राह्मणों को दक्षिणा दी जाती है। ब्राह्मण को भोजन करवाना कल्याणकारी समझा जाता है। मान्यता है कि इस दिन सत्तू अवश्य खाना चाहिए तथा नए वस्त्र और आभूषण पहनने चाहिए। गौ,भूमि, स्वर्ण पात्र इत्यादि का दान भी इस दिन किया जाना श्रेयस्कर होता है। यह तिथि वसन्त ऋतु के अन्त और ग्रीष्म ऋतु का प्रारम्भ का दिन भी है इसलिए अक्षय तृतीया के दिन जल से भरे घड़े, कुल्हड, सकोरे, पंखे, खडाऊँ, छाता, चावल, नमक, घी, खरबूजा, ककड़ी, शक्कर, साग, इमली, सत्तू आदि गर्मी में लाभकारी वस्तुओं का दान पुण्यकारी माना गया है। इस दान के पीछे यह लोक विश्वास है कि इस दिन जिस भी वस्तुओं का दान किया जाता है वे समस्त वस्तुएँ स्वर्ग व अगले जन्म में प्राप्त होती है।
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