ओडिशा के सिजिमाली में अशांति चिंताजनक, केंद्र कराए निष्पक्ष जांच : कांग्रेस


नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (वार्ता) कांग्रेस ने ओडिशा के रायगड़ा और कालाहांडी जिलों के सिजिमाली क्षेत्र में उत्पन्न अशांति पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से पूरे घटनाक्रम की व्यापक और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने मंगलवार को सोशल मीडिया एक्स पर इसको लेकर कहा कि क्षेत्र में प्रस्तावित बॉक्साइट खनन परियोजना और उससे जुड़ी आधारभूत संरचनाओं को लेकर स्थानीय आदिवासी समुदायों में व्यापक असंतोष है, जिसे संवेदनशीलता से संभालने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि ओडिशा जन आंदोलनों का साक्षी रहा है, विशेषकर तब जब बड़े पारिस्थितिक प्रभाव वाली खनन परियोजनाओं को कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों को दरकिनार करते हुए लागू करने की कोशिश की जाती है। सिजिमाली की स्थिति भी उसी कड़ी का हिस्सा प्रतीत होती है।
उन्होंने कहा कि पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (पीईएसए), 1996 और वन अधिकार अधिनियम (एफआरए), 2006 के प्रावधानों का गंभीर उल्लंघन हुआ है। इन कानूनों के तहत प्रभावित समुदायों, ग्राम सभाओं और स्थानीय संस्थाओं को जो अधिकार प्राप्त हैं, उन्हें कथित तौर पर कमजोर किया गया या नजरअंदाज किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने अनुसूचित जनजाति समुदायों, विशेषकर महिलाओं के खिलाफ असंगत बल का प्रयोग किया, जो अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 का उल्लंघन है।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री स्वयं आदिवासी समुदाय से आते हैं और केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री भी ओडिशा से ही हैं, ऐसे में उनसे अपेक्षा है कि वे अधिक संवेदनशीलता दिखाते हुए सिजिमाली की घटनाओं की स्वतंत्र जांच के आदेश दें।
उन्होंने जोर देकर कहा कि पीईएसएऔर एफआरए जैसे कानूनों का पालन केवल कागजों पर नहीं, बल्कि व्यवहार में भी पारदर्शी, विश्वसनीय और सहभागी तरीके से सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

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