डॉ अम्बेडकर केवल किसी एक वर्ग विशेष तक सीमित नही थे : न्यायमूर्ति श्री गौतम चौधरी


प्रयागराज, ( दिनेश तिवारी)  डॉ अम्बेडकर केवल किसी एक वर्ग विशेष के हितों तक सीमित थे।  उनका चिंतन व्यापक थाए जिसमें धार्मिकए आर्थिक और सामाजिक सभी पहलुओं का समावेश था।

      इलाहाबाद संग्रहालय में डॉ भीमराव अम्बेडकर की 135वीं जयंती की पूर्व संध्या पर विशेष प्रदर्शनी एवं गोष्ठी का आयोजन के दौरान सोमवार को न्यायमूर्ति श्री गौतम चौधरी ने लीगो को संबोधित करते हुए कहा कि  यह धारणा उचित नहीं है कि डॉ अम्बेडकर केवल किसी एक वर्ग विशेष के हितों तक सीमित थे। उन्होंने स्पष्ट किया । उनका चिंतन व्यापक थाए जिसमें धार्मिकए , आर्थिक और सामाजिक सभी पहलुओं का समावेश था।

    उन्होंने कहा कि वह धार्मिक कुरीतियों और आर्थिक शोषण के प्रखर विरोधी तथा समाज सुधारक थे। उन्होंने यह भी बल दिया कि डॉ अम्बेडकर के विचारों का मूल आधार अन्याय के विरुद्ध सशक्त रूप से खड़े होना थाए अतः उनके विराट व्यक्तित्व को किसी संकीर्ण दायरे में नहीं बाँधा जाना चाहिए।

    न्यायमूर्ति चौधरी ने कहा कि डॉ भीमराव अम्बेडकर का जीवन सामाजिक न्याय समानता और मानवाधिकारों की स्थापना के लिए समर्पित रहा है । भारतीय संविधान के निर्माण में उनकी केंद्रीय भूमिका ने देश को एक सशक्त लोकतांत्रिक ढांचा प्रदान किया है। उनकी जयंती केवल एक महापुरुष के जन्मदिवस का उत्सव नहींए बल्कि समाज में समताए शिक्षा और जागरूकता के मूल्यों को आत्मसात करने का प्रेरणादायक अवसर है।

      प्रदर्शनी के मुख्य आकर्षणों में अंग्रेजी समाचार पत्र ष्भारत ज्योतिष् में प्रकाशित लेख ष्बायोग्राफी ऑफ द मैन विद ए मिशन , अम्बेडकर द फाइटर, हिंदी समाचार पत्र में स गो बर्चे द्वारा लिखित 

सामाजिक क्रांति के अग्रदूत बाबा साहब अम्बेडकर वर्ष 1966 के ष्लीडर में प्रकाशित ष्सिंबल ऑफ सोशल रिवोल्ट , वर्ष 1948 के समाचार पत्र में प्रकाशित डॉ अम्बेडकर का आकर्षक कार्टून तथा ष्टाइम्स ऑफ इंडियाष् (1956) और ष्नेशनल हेराल्डष् ;(1956) के महत्वपूर्ण लेख सम्मिलित हैंए जो उनके व्यक्तित्व और विचारों की गहराई को दर्शाते हैं।

      कार्यक्रम में संग्रहालय के अधिकारीगण सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही , जिसने आयोजन की महत्ता को और अधिक बढ़ा दिया।

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