चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया पर गैर-कानूनी सामग्री पर सख्ती की

चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया पर गैर-कानूनी सामग्री पर सख्ती की

नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (वार्ता) चुनाव आयोग ने 2026 में विधानसभा चुनावों और उपचुनावों के दौरान सोशल मीडिया पर गैर-कानूनी, भ्रामक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता ( एआई) जनित सामग्री का उपयोग करने और चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए सख्त नियम लागू किए।


आयोग ने एक प्रेस नोट जारी करते हुए कहा, "सभी संबंधित पक्षों को मौजूदा कानूनी प्रावधानों, जैसे कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 और आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) के अनुसार सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का जिम्मेदारी से और नैतिक रूप से इस्तेमाल सुनिश्चित करना चाहिए।"


 आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि एआई से बनाया गया कोई भी गुमराह करने वाला या गैर-कानूनी कंटेंट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट किए जाने के तीन घंटे के भीतर हटा दिया जाना चाहिए।


 चुनाव आयोग ने कृत्रिम मीडिया से जुड़े राजनीतिक प्रचार में अधिक पारदर्शिता लाने का भी निर्देश दिया। राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और उनके प्रतिनिधियों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे कंटेंट पर साफ तौर पर 'एआई-जनित', 'डिजिटली परिष्कृत' या 'कृत्रिम सामग्री' का लेबल लगाएं और साथ ही यह भी बताएं कि यह सामग्री किसने बनायी है।


 आयोग ने कहा कि यह कदम तेजी से बढ़ते डिजिटल चुनावी माहौल में 'पारदर्शिता बनाए रखने और मतदाताओं का भरोसा जीतने' के लिए जरूरी है।


 यह निर्देश पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों के बीच आया है, जहां अधिकारी ऑनलाइन कंटेंट पर बारीकी से नजर रख रहे हैं ताकि किसी भी नियम के उल्लंघन को रोका जा सके।


 आयोग के अनुसार जो पोस्ट आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करते हैं, चुनाव प्रक्रिया के बारे में गलत बातें फैलाते हैं या जिनसे कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा होता है, उन्हें आईटी ढांचे के तहत नियुक्त किए गए राज्य आईटी नोडल अधिकारी ट्रैक कर रहे हैं और उन पर कार्रवाई कर रहे हैं।


 आयोग ने कहा कि 15 मार्च को चुनावों की घोषणा के बाद से 11,000 से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट और यूआरएल की पहचान की गई है, जिन पर कार्रवाई की जानी है। इन कार्रवाइयों में कंटेंट हटाना, प्राथमिकी दर्ज करना और स्पष्टीकरण तथा खंडन जारी करना शामिल है।


 आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों विशेष रूप से धारा 126 को भी दोहराया। यह धारा मतदान समाप्त होने से पहले के 48 घंटे के दौरान चुनाव से संबंधित कंटेंट दिखाने पर रोक लगाती है। इसमें कहा गया है कि टेलीविजन, रेडियो, प्रिंट और सोशल मीडिया को इन नियमों का सख्ती से पालन करना जरूरी है।

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