गुणवत्तापूर्ण शिक्षा , अनुशासन और नैतिक मूल्यों पर विशेष जोर’ : राज्यपाल


प्रयागराज, (दिनेश तिवारी)  उत्तर प्रदेश कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय का मकसद छात्रों को सिर्फ डिग्रियां बांटना नहीं बल्कि उन्हें योग्य और आत्मनिर्भर बनाना है।

प्रो राजेंद्र प्रसाद रज्जू भैया विश्वविद्यालय में नवनिर्मित शैक्षणिक सुविधाओं का लोकार्पण करने के लिए शनिवार को राज्यपाल प्रयागराज पहुंचीं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का मकसद छात्रों को सिर्फ डिग्रियां बांटना नहीं बल्कि उन्हें योग्य और आत्मनिर्भर बनाना है। कई दिनों से विश्वविद्यालय परिसर के बाहर चल रहे आंदोलन की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि अभिभावकों को विश्वविद्यालय पहुंचकर अपने बच्चों की स्थिति का मूल्यांकन करना चाहिए। छात्रों को नशे से दूर रहते हुए अपने भविष्य पर ध्यान देना चाहिए।

अपने संबोधन में उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा , अनुशासन और नैतिक मूल्यों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के लिए निर्मित शैक्षणिक सुविधाएं उत्कृष्ट एवं उच्च गुणवत्ता की होनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से प्रयोगशालाओं के प्रभावी एवं नियमित उपयोग पर बल देते हुए कहा कि इनके माध्यम से विद्यार्थी अधिक व्यावहारिक ज्ञान अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने मूल्यांकन प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता पर जोर दियाए जिससे शिक्षा अधिक पारदर्शी एवं परिणामोन्मुखी बन सके। अभिभावकों से भी आह्वान किया कि वे समय.समय पर विश्वविद्यालय आकर यह अवलोकन करें कि उनके बच्चे क्या सीख रहे हैं और किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वैश्विक परिप्रेक्ष्य में उन्होंने वर्तमान विश्व परिस्थितियों एवं संघर्षों का उल्लेख करते हुए आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि किसी भी राष्ट्र का विकास उसकी दूरदर्शिता पर निर्भर करता है।


      विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वे स्वयं को केवल अपने परिवार की अपेक्षाओं तक सीमित न समझें , बल्कि देश के करोड़ों नागरिकों के सपनों का प्रतिनिधि मानते हुए अपने लक्ष्य निर्धारित करें। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे यह विचार करें कि वे राष्ट्र निर्माण में क्या योगदान दे सकते हैंए क्योंकि प्रत्येक युवा की सकारात्मक सोच एवं प्रयास ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


    उन्होंने कहा कि आज का भारत अवसरों से परिपूर्ण है, जहां प्रत्येक विद्यार्थी के पास अपने सपनों को साकार करने की असीम संभावनाएं हैं। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे केवल रोजगार तक सीमित न रहें , बल्कि नवाचार, शोध एवं सृजनात्मक कार्यों के माध्यम से देश के विकास में योगदान दें। उन्होंने कहा कि आज का भारत एक आकांक्षी भारत है , जहां हर व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है | उन्होंने कहा कि वर्तमान समय तकनीक , नवाचार एवं डिजिटल क्रांति का युग है , जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उन्नत तकनीकों ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित किया है। तकनीक के साथ.साथ मानवीय मूल्यों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वे केवल तकनीकी रूप से दक्ष न बनें बल्कि नैतिक रूप से भी सशक्त बनें तथा अपने ज्ञान का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के कल्याण के लिए करें।


  उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का वर्तमान दशक चुनौतियों एवं संभावनाओं का संगम है,  जहां वैश्विक परिस्थितियों के बीच आत्मनिर्भरता की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। भारत ने कठिन परिस्थितियों को अवसर में परिवर्तित करने की क्षमता प्रदर्शित की है तथा तकनीकी क्षेत्र में तीव्र गति से प्रगति करते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। देश में सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हो रहे विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत के तकनीकी आत्मविश्वास का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में स्थापित हो रहे सेमीकंडक्टर संयंत्र देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हैं।


     राज्यपाल ने कहा कि आज का भारत केवल परिवर्तन का साक्षी नहीं , बल्कि परिवर्तन का नेतृत्वकर्ता बन चुका है। ऊर्जा , तकनीक एवं नवाचार के क्षेत्र में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बना रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे समय के साथ चलने के साथ.साथ समय को दिशा देने का संकल्प लें , ताकि वे स्वयं के साथ.साथ राष्ट्र के उज्ज्…

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