चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव से पहले पर्यवेक्षकों को दिये विस्तृत निर्देश, निष्पक्ष मतदान पर जोर


नयी दिल्ली, 01 अप्रैल (वार्ता) चुनाव आयोग ने बुधवार को केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी में नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले केंद्रीय पर्यवेक्षकों (ऑब्जर्वर्स) को विस्तार से दिशा निर्देश दिये और स्पष्ट किया कि चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष, भयमुक्त और प्रलोभन रहित होने चाहिये।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में 282 केंद्रीय पर्यवेक्षक और तीनों राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
आयोग के अनुसार, कुल 282 पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं, जिनमें सामान्य, पुलिस और व्यय पर्यवेक्षक शामिल हैं। इनमें से 136 असम, 108 केरल और 38 पुडुचेरी में नियुक्त किए गए हैं। ये पर्यवेक्षक चुनाव प्रक्रिया की निगरानी, नियमों के पालन और आयोग तथा स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
आयोग ने पर्यवेक्षकों को निर्देश दिया कि वे आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें और किसी भी उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई करें। साथ ही उन्हें जनता, राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए सुलभ रहने को कहा गया है। आयोग ने निर्देश दिया कि पर्यवेक्षक अपने संपर्क विवरण सार्वजनिक करें और शिकायतों की सुनवाई के लिए समय और स्थान स्पष्ट रूप से निर्धारित करें, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।
मतदान केंद्रों की तैयारियों पर विशेष जोर देते हुए आयोग ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों को दिए जाने वाले प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा मतदाता प्रतिशत के आंकड़ों को ईसीआईनेट के माध्यम से समय पर अपडेट करना, अमिट स्याही का सही उपयोग और मतदान समाप्ति के बाद फॉर्म 17-सी जैसे वैधानिक दस्तावेजों को सही ढंग से भरकर पोलिंग एजेंट्स के साथ साझा करना भी सुनिश्चित किया जाए।
आयोग ने सभी मतदान केंद्रों पर न्यूनतम सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, जिनमें मतदाताओं के लिए बैठने की व्यवस्था और मोबाइल फोन जमा करने जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
तकनीकी निगरानी को मजबूत करने के लिए वेबकास्टिंग मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम को पूरी तरह सक्रिय रखने और उनका ट्रायल रन करने को कहा गया है। आयोग ने निर्देश दिया कि इन केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि वे किसी भी गड़बड़ी को तुरंत पहचान कर रिपोर्ट कर सकें।

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