एक ही मामले में बार.बार याचिका फोरम हंटिगः उच्च न्यायालय


प्रयागराज, (दिनेश तिवारी ) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक ही मामले में बार.बार याचिका दायर किए जाने को  फोरम हंटिंग का उदाहरण बताते हुए अनुचित निरूपित किया है। तीसरी बार दायर याचिका खारिज करते हुए कहा है कि याची के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। 

     न्यायमूर्ति समीर जैन की एकलपीठ ने यह आदेश दिया है।

       न्यायालय  ने उच्चतम न्यायालय के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि एक ही मामले में दूसरी बार सीआरपीसी के 482  क्वैशिंग पिटीशन ( रद्दीकरण याचिका ) दायर करना संभव नहीं है , अगर पहले से ही सभी तर्क और साक्ष्य उपलब्ध थे। हालांकि यह नियम सभी मामलों में लागू नहीं होता। यह प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। अगर कोई व्यक्ति दूसरी बार क्वैशिंग पिटीशन दायर करना चाहता है तो उसे यह साबित करना होगा कि परिस्थितियों में बदलाव आया है। विधिक मंच का दुरुपयोग रोकने के लिए यह आवश्यक है कि अदालतें इस तरह की पिटीशनों को सावधानी से सुनें और निर्णय लें।

        मुकदमे से जुड़े संक्षिप्त तथ्य यह हैं कि याची रामदुलार सिंह  ने न्यायालय से अनुरोध किया है कि वाराणसी के लोहता थाने में दर्ज मामले में आरोप पत्र ( चार्जशीट ) और एसीजेएम कोर्ट का समन रद किया जाए। मामला धोखाधड़ी तथा धमकाने से संबंधित है। इससे पहले उच्च न्यायालय ने 28 मार्च 2023 को  मामले में फैसला सुरक्षित रखा था , लेकिन 14 महीने बाद 27 मईए 2024 तक फैसला नहीं सुनाया गया।      

       याची  ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की। उच्चतम न्यायालय ने  14 महीने बाद भी फैसला नहीं सुनाए जाने को अनुचित माना। साथ ही उच्च न्यायालय से कहा कि मामले को जल्द से जल्द निपटाएं , यथासंभव तीन महीने के भीतर। शीर्ष अदालत ने यह भी आदेश दिया था कि जब तक उच्च न्यायालय इस मामले पर विचार नहीं करता , तब तक ट्रायल कोर्ट में सुनवाई प्रक्रिया स्थगित रहेगी। इसके बाद 20 जनवरी 2025 को उच्च न्यायालय की एक अन्य बेंच ने इस मामले को कदम पैरवी में खारिज कर दिया क्योंकि कोई भी पक्ष उपस्थित नहीं था। 

     बाद में याची  की ओर से  आदेश वापसी अर्जी दायर की गई थी। आठ अप्रैल 2025 को उच्च न्यायालय की एक अन्य बेंच इस आवेदन को स्वीकार कर लिया। साथ ही निर्देश दिया कि ट्रायल कोर्ट निर्णय तक मामले की प्रक्रिया स्थगित रखें। विपक्षी के वकील ने कहा कि यह दूसरा आवेदन है और इसमें भी एक ही प्रार्थना है जो पूर्व में खारिज की जा चुकी है।।             याची  के वकील ने कहा कि यह आवेदन पहले वाले से अलग है। इसमें चार्जशीट और समन की वैधता को चुनौती है जबकि पहले केवल एनबीडब्ल्यू के आदेश को चुनौती दी गई थीए जिसे खारिज कर दिया गया था।

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