मुख्यमंत्री को केडीए के लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ जांच कराने के निर्देश
प्रयागराज, (दिनेश तिवारी) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पट्टे के बाद भी 41 साल तक कब्जा न देने पर नाराजगी जताई है। इस माम्नले में कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए ) के अधिकारियों की लापरवाही के मामले में मुख्यमंत्री को जांच कराने और दोषियों से हर्जाना वसूलने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने 90 वर्षीय बीएन त्रिपाठी की अपील पर केडीए को जाजमऊ स्थित प्लॉट.56 का कब्जा एक महीने के अंदर वादी को सौंपने का आदेश दिया है। वादी को 1984 में 2222 वर्ग गज का एक भूखंड 999 वर्ष के पट्टे पर आवंटित किया गया था। वादी सबसे अधिक बोली लगाने वाला था , उसने भुगतान भी कर दिया था। इसके बावजूद केडीए ने कब्जा नहीं सौंपा। ऐसे में उसने उच्च न्यायालय में अपील दायर की।
केडीए के अधिवक्ता ने दलील दी कि वादी को कब्जा पहले ही दिया जा चुका है। हालांकि, प्राधिकरण इसके पक्ष में कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं कर सका। उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि वादी ने 1984 में ही पूरी लीज राशि जमा कर दी थी , फिर भी उसे कब्जा पाने के लिए दर.दर भटकना पड़ा। इस लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान दूसरी वादी युगराणी देवी का निधन हो गया। मुख्य वादी अब 90 वर्ष का हो चुका है।
न्यायालय ने वादी को एक जुलाई 1987 से कब्जा मिलने तक 13 हज़ार 700 रुपये प्रति माह की दर से क्षतिपूर्ति , उस पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज , कारखाना स्थापित करने की लागत के लिए पांच लाख रुपये और मानसिक उत्पीड़न के लिए दो लाख रुपये देने का आदेश दिया।

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