गोरखपुर में ग्रामीण महिलायें पेश कर रही है उद्यमिता की मिसाल


गोरखपुर, 27 फरवरी (वार्ता) उत्तर प्रदेश में महिलाओं को आत्मनिर्भर और रोजगारप्रदाता बनाने की दिशा में सरकार की पहल का असर अब गांवों में भी दिखने लगा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं उद्यमिता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। ब्रह्मपुर विकास खंड के ग्राम जंगल रसूलपुर नंबर-2 निवासी निर्मला देवी इसका उदाहरण हैं। पहले वह एक सामान्य गृहिणी थीं और उनके पति ऑटो चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। सीमित आय में परिवार चलाना कठिन था, लेकिन एनआरएलएम की जानकारी मिलने के बाद निर्मला ने 10 महिलाओं के साथ ‘शिखर महिला स्वयं सहायता समूह’ का गठन किया।
समूह के माध्यम से उन्होंने ‘शिखर गृह उद्योग’ के नाम से नमकीन और पापड़ निर्माण का कार्य शुरू किया। इसके लिए उन्हें दो लाख 10 हजार रुपये का समूह ऋण मिला। मिशन के सहयोग से उनका कारोबार आगे बढ़ा और आज वह प्रतिदिन औसतन दो क्विंटल नमकीन और पापड़ तैयार कर थोक एवं फुटकर बाजार में बिक्री कर रही हैं।
निर्मला के पति केशभान भी अब ऑटो चलाने के बजाय गृह उद्योग की मार्केटिंग से जुड़ गए हैं। इस उद्यम से आठ अन्य महिलाओं को रोजगार मिला है, जबकि एक कारीगर को 15 हजार रुपये मासिक मानदेय पर कार्य दिया गया है। निर्मला को अपने उद्योग से औसतन 60 हजार रुपये प्रतिमाह की आय हो रही है। वार्षिक आय के आधार पर वह ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार गोरखपुर जिले में एनआरएलएम के तहत अब तक 21,020 महिला स्वयं सहायता समूह गठित किए जा चुके हैं, जिनमें से 20,667 समूह मिशन पोर्टल पर पंजीकृत हैं। इन समूहों से 2,94,815 परिवार जुड़े हैं। जिले में 18,059 समूहों को रिवॉल्विंग फंड, 14,449 समूहों को सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) और 11,925 समूहों को बैंक क्रेडिट लिंकेज प्रदान किया गया है।

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