सहकारी बैंकों के निदेशकों के लिए 10 साल के कार्यकाल के बाद तीन साल का अंतराल हुआ अनिवार्य
मुंबई, 25 मई (वार्ता) शहरी और ग्रामीण सहकारी बैंकों के निदेशकों के लिए 10 साल की लगातार सेवा के बाद तीन साल का अंतराल (कूलिंग ऑफ पीरियड) अनिवार्य कर दिया गया है।रिजर्व बैंक ने इस संबंध में सोमवार को दो अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी कीं। इनमें कहा गया है कि किसी शहरी सहकारी बैंक (यूसीबी) या ग्रामीण सहकारी बैंक (आरसीबी) के निदेशक के लिए 10 साल तक लगातार पद पर बने रहने का बाद कम से कम तीन साल के लिए पद छोड़ना अनिवार्य होगा। इस दौरान वह सदस्य/खाताधारक के अलावा किसी और हैसियत से बैंक से जुड़ा नहीं रह सकेगा। हालांकि वह दूसरे सहकारी बैंक में अर्हता पूरी करने की स्थिति में निदेशक बन सकता है। तीन साल बाद वह पुराने बैंक में दोबारा निदेशक बन सकता है।
यदि 10 साल की अवधि पूरी होने से पहले ही कोई निदेशक पद से हटता है, लेकिन हटने के तीन साल के भीतर दोबारा उसी सहकारी बैंक में निदेशक बन जाता है तो उसकी पुरानी कार्य अवधि को भी सेवा काल की गणना में शामिल किया जायेगा।
यूसीबी के निदेशकों के लिए अधिकतम कार्य अवधि की सीमा 29 जून 2020 से आठ साल तय की गयी थी। आरसीबी के निदेशकों के लिए (जिसमें राज्य सहकारी बैंक और केंद्रीय सहकारी बैंक शामिल हैं) 01 अप्रैल 2021 से कार्यकाल की अधिकतम सीमा आठ साल तय की गयी थी। बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 में यूसीबी और आरसीबी निदेशकों का अधिकतम कार्यकाल बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया। यह कानून 01 अगस्त 2025 से प्रभाव में आया था।
रिजर्व बैंक ने बताया कि कुछ ऐसे मामले सामने आये हैं जिनमें निदेशक बेहद कम समय के लिए इस्तीफा देने के बाद फिर से निदेशक मंडल में शामिल हो गये। यह नियमों के उद्देश्य को हासिल करने में बाधक बन रहा था। इसीलिए, इन संशोधनों की आवश्यकता महसूस की गयी।

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