17 मई से शुरू होगा पुरुषोत्तम मास, काशी में भगवान विष्णु को लगेगा विशेष मालपुए का भोग
वाराणसी, 15 मई (वार्ता) सनातन धर्म में विशेष महत्व रखने वाला पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) इस वर्ष 17 मई से प्रारंभ होकर 15 जून तक चलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह मास लगभग 33 महीनों में एक बार आता है और भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस पूरे माह भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और स्मरण करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।धार्मिक नगरी काशी में पुरुषोत्तम मास को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। गोदौलिया क्षेत्र के हौज कटोरा मोहल्ले में स्थित प्राचीन पुरुषोत्तम मंदिर में इस अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन किए जाएंगे। मंदिर का उल्लेख काशी खंड में भी मिलता है और अधिकमास के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं।
मंदिर के महंत शंकर दीक्षित ने बताया कि भगवान त्र्यंबकेश्वर मंदिर परिसर में स्थित काले पत्थर से निर्मित भगवान श्री हरि विष्णु की भव्य प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास में इस स्वरूप के दर्शन और पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
उन्होंने बताया कि इस विशेष मास में भगवान विष्णु को प्रिय माने जाने वाले मालपुए का विशेष भोग लगाया जाता है। इसके चलते स्थानीय बाजारों और दुकानों पर मालपुओं की मांग भी बढ़ जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जैसे भगवान गणेश को मोदक और लड्डू प्रिय हैं, उसी प्रकार भगवान विष्णु को मालपुआ अत्यंत प्रिय माना जाता है।
मंदिर में भगवान विष्णु के 33 नामों के साथ 33 मालपुए अर्पित कर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर की दीवारों पर श्री हरि के 33 नाम अंकित हैं, जिनका श्रद्धालु अधिकमास में विशेष रूप से स्मरण करते हैं। आमतौर पर शांत रहने वाला यह प्राचीन मंदिर पुरुषोत्तम मास के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से गुलजार हो उठता है और मंदिर तक जाने वाली संकरी गलियों में भक्तों का तांता लगा रहता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और भूमि क्रय जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। यह पूरा माह भगवान विष्णु के स्मरण, जप, तप और पूजा-अर्चना के लिए समर्पित माना जाता है।

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