6–7 मई 2026 की दरमियानी रात होगा, ईटा एक्वारिड्स उल्का वृष्टि का अद्भुत खगोलीय नज़ारा


खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि मई माह की प्रमुख खगोलीय घटनाओं में से एक ईटा एक्वारिड्स उल्का वर्षा इस वर्ष 6–7 मई 2026 की दरमियानी रात को अपने चरम (Peak) पर पहुंचेगी। यह उल्का वृष्टि की घटना प्रतिवर्ष होने वाली नियमित उल्का वर्षाओं में शामिल है, जिसकी सक्रिय अवधि लगभग 19 अप्रैल से 28 मई तक रहती है।

क्योंकि यह उल्का वर्षा प्रसिद्ध धूमकेतु 1P/Halley (हैली) के छोड़े गए धूल और चट्टानी कणों (debris stream) से उत्पन्न होती है। जब पृथ्वी अपनी कक्षा में घूमते हुए इन कणों के मार्ग से गुजरती है, तो ये कण वायुमंडल में प्रवेश करते समय वायुमंडलीय घर्षण के कारण जलते हैं और आकाश में चमकीली लकीरों जिनको उल्काएं कहा जाता है (meteors) के रूप में दिखाई देते हैं।


कितनी तेज़ी से आती हुई दिखाई देंगी ये उल्काएं ?

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला ( तारामण्डल) गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 

खगोल विज्ञान के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार, उल्काएं पृथ्वी के वायुमंडल में लगभग 11 से 72 किमी/सेकंड की गति से प्रवेश करती हैं। और ईटा एक्वारिड्स विशेष रूप से तेज उल्काओं में से एक (लगभग 66 किमी/सेकंड) से आती हैं, इसलिए ये लंबी और चमकीली लकीरें बनाती हैं, जिन्हें कभी कभी दीर्घकाल तक बनी रहने वाली चमकीली लकीरें” (persistent trains) भी कहा जाता है।

 कितनी उल्काएं दिखने की संभावना है, इस बार?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारत जैसे उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में, आदर्श परिस्थितियों (अंधेरा आकाश, कम प्रकाश प्रदूषण होने पर) में प्रति घंटे लगभग 10–30 उल्काएं देखी जा सकती हैं, जबकि अत्यंत अनुकूल परिस्थितियों में यह संख्या 40–50 प्रति घंटा तक भी पहुँच सकती है। 

कितने बजे से कितने बजे तक दिखाई देंगी, ईटा एक्वारिड्स उल्का वर्षा ?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस उल्का वृष्टि को देखने का सर्वोत्तम समय 6 मई की रात में 2:00 बजे से लेकर 7 मई की भोर/ सुबह 4:30 बजे (IST) के बीच इनकी दृश्यता सर्वश्रेष्ठ रहेगी। इसका कारण यह है कि इस समय Aquarius (कुंभ राशि) आकाश में अपेक्षाकृत ऊँचाई पर होती है, जो इस उल्का वर्षा का “रेडिएंट” (उद्गम बिंदु) है,हालांकि महत्वपूर्ण खगोल वैज्ञानिक तथ्य यह है कि उल्काएं केवल रेडिएंट के पास ही नहीं, बल्कि आकाश के किसी भी भाग में दिखाई दे सकती हैं। रेडिएंट केवल दिशा सूचक होता है, न कि देखने की सीमा। इस दौरान घटता हुआ चंद्रमा (Waning Moon) मौजूद रहेगा, जिससे आकाश की पृष्ठभूमि थोड़ी उजली हो सकती है। फिर भी ईटा एक्वारिड्स की उच्च गति और चमक के कारण प्रमुख उल्काएं स्पष्ट रूप से दिखाई देने की संभावना बनी रहती है।

 इस ईटा एक्वारिड्स का भौगोलिक प्रभाव क्या होगा ? 

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल वैज्ञानिक रूप से यह भी स्थापित है कि यह उल्का वर्षा दक्षिणी गोलार्ध में अधिक सक्रिय दिखती है, क्योंकि रेडिएंट वहाँ अधिक ऊँचाई तक पहुँचता है। लेकिन फिर भी भारत (लगभग 8°–37° उत्तरी अक्षांश) की स्थिति ऐसी है कि यहाँ भी अच्छा अवलोकन संभव है। क्योंकि भारत में 6–7 मई 2026 की दरमियानी रात चरम पर, भोर से पहले दिखेगा यह अद्भुत खगोलीय नज़ारा।

किस ख़ास धूमकेतु के कारण होती है यह उल्का वृष्टि ?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि धूमकेतु 1P/Halley ( हैली ) द्वारा छोड़े गए मलबे के कारण यह उल्का वृष्टि होती है और इसी हैली धूमकेतु के कारण से अक्टूबर में एक अन्य उल्का वर्षा ओरियोनिड्स भी उत्पन्न होती है, जो लगभग 20 अक्टूबर के आसपास चरम पर होती है। हैली धूमकेतु का परिक्रमण काल लगभग 76 वर्ष है और यह अगली बार वर्ष 2061 में पृथ्वी के निकट दिखाई देगा।

 कैसे देखें इस ईटा एक्वारिड्स उल्का वृष्टि के शानदार खगोलीय नज़ारे? 

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ईटा एक्वारिड्स उल्का वृष्टि को देखने के लिए आपको प्रकाश प्रदूषण से पूर्णतः दूर जाकर, पूर्ण सावधानी पूर्वक किसी साफ़, स्वच्छ एवं अंधेरी बाली जगहों/स्थान का चयन करना चाहिए और पहले अपनी साधारण आंखों को आकाश के सापेक्ष समायोजित करना चाहिए जिस से कोई भी बाहरी प्रकाश प्रदूषण आपकी आंखों पर न आए इसीलिए ज़रूरी है कि अपनी आँखों को अंधेरे में अनुकूल होने के लिए कम से कम तो 15–20 मिनट दें 

आकाश की किस दिशा में देखें जिस से अच्छी तरीक़े से देख सकें ?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आपको इस शानदार खगोलीय नज़ारे का भरपूर लुत्फ़ उठाने के लिए आकाश में पूर्व–दक्षिण दिशा की ओर खुले आकाश की ओर देखने पर उल्काओं की यह शानदार खगोलीय संख्या बढ़ सकती है क्योंकि इसी के पास होगा इसका रेडियंट पॉइंट, लेकिन वैसे तो यह उल्का वृष्टि पूरे आकाश में कहीं से भी आती हुईं दिखाईं देंगी।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस ईटा एक्वारिड्स उल्का वृष्टि को देखने के लिए आपको किसी दूरबीन की आवश्यकता नहीं है आप अपनी साधारण आँखों/नंगी आँखों से भी सर्वोत्तम अवलोकन कर सकते हैं, लेकिन अगर आपके पास कोई टेलीस्कोप/ दूरबीन या विनोकुलर एवं अच्छा मोबाइल कैमरा वगैरह साथ ही किन्हीं भी विशेष खगोलीय प्रकार के एस्ट्रोनॉमिकल उपकरण मौजूद हैं तब आप रेडियंट पॉइंट की तरफ़ करके आश्चर्यजनक रूप से उच्च कोटि की एस्ट्रोफोटोग्राफी भी कर सकते हैं जो अपने आप में रोमांचकारी अनुभव होता है।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोलीय रूप से यह स्पष्ट है कि भारत में इसका चरम 6–7 मई 2026 की दरमियानी रात, ईटा एक्वारिड्स उल्का वर्षा देखने के लिए अनुकूल है। यदि मौसम साफ रहा, तो यह घटना आम लोगों और खगोल प्रेमियों के लिए एक दुर्लभ और रोमांचक प्राकृतिक प्रदर्शन साबित हो सकती है।


               सादर।

              धन्यवाद।

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© खगोलविद अमर पाल सिंह,

एस्ट्रोनॉमी एजुकेटर वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामण्डल) गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत।

मोबाइल: नंबर+917355546489,

+917518016100,

ईमेल आईडी: amarpal2250@gmail.com

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