वाराणसी दाल मंडी मामले में दाखिल अवमानना याचिकाएं खारिज


प्रयागराज, (दिनेश तिवारी) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी स्थित दाल मंडी में ध्वस्तीकरण के मामले में दाखिल दो अवमानना याचिकाओं को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। 

       न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने यह आदेश दिया है। 

       न्यायालय  ने स्पष्ट किया कि जब प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ही नहीं की तो न्यायालय के आदेश की अवमानना का प्रश्न ही नहीं उठता।

वाजिद अब्बास की अवमानना याचिका के अनुसार वाराणसी के गोविंदपुरा स्थित दाल मंडी में एक मकान में तीन भाइयों अली अब्बास , हसन अब्बास व जाफर अब्बास का हिस्सा था। हसन और जाफर ने अपना 2/ 3 हिस्सा राज्य सरकार को बेच दिया जबकि वाजिद अब्बास , अली अब्बास के पुत्र का 1/ 3 हिस्सा अब भी उनके पास है , जहां वह सोनू इंटरप्राइजेज नाम से दुकान चला रहे हैं। 

      जिलाधिकारी का हलफनामा पेश कर अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने बताया कि प्रशासन वहां ध्वस्तीकरण की कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है क्योंकि दो भाइयों वाले हिस्से को ढहाया गया तो याची की दुकान भी गिर सकती है इसलिए कार्रवाई रोक दी गई है।

     न्यायालय ने पाया कि याची ने इस तथ्य का कोई ठोस खंडन नहीं किया है इसलिए अवमानना का कोई मामला नहीं बनता। इसी तरह याची अब्दुल सलाम कुरैशी ने वाराणसी विकास प्राधिकरण , नगर निगम और डीएम के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जिस मूल याचिका पर आदेश हुआ थाए उसमें वीडीए और नगर निगम को पक्षकार बनाया ही नहीं गया था। 

      नगर निगम के अधिवक्ता बिपिन बिहारी पांडेय ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार द्वारा कोई ध्वस्तीकरण नहीं किया गया है। केवल वीडीए द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं। कोर्ट ने याची को वीडीए के नोटिस का जवाब देने का निर्देश देते हुए याचिका को गलत मानते हुए खारिज कर दिया।

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