सोनभद्र के गुलाब जामुन को मिलेगी वैश्विक पहचान


सोनभद्र, 15 मई (वार्ता) देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में पहचान रखने वाला उत्तर प्रदेश का सोनभद्र जिला अब अपने विशेष स्वाद वाले गुलाब जामुन के लिए भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। प्रदेश सरकार ने ‘एक जिला, एक व्यंजन’ (ओडीओसी) योजना के तहत सोनभद्र के प्रसिद्ध गुलाब जामुन को शामिल किया है।

सरकार के इस निर्णय से स्थानीय कारीगरों और छोटे उद्यमियों के लिए रोजगार तथा व्यापार विस्तार की नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद है। जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र के उपायुक्त विनोद कुमार चौधरी ने बताया कि सरकार इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक विशेष सेल का गठन करेगी। यह सेल गुलाब जामुन कारोबार से जुड़े उद्यमियों की समस्याओं के समाधान के साथ उन्हें आर्थिक सहायता और बैंक ऋण उपलब्ध कराने में सहयोग करेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक उद्यमियों के रूप में विकसित करना है, ताकि स्थानीय उत्पाद राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार तक पहुंच सकें।
उपायुक्त के अनुसार गुलाब जामुन बनाने वाले कारीगरों को आधुनिक तकनीक, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण, स्वच्छता मानकों और उत्पाद की शेल्फ-लाइफ बढ़ाने संबंधी विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे सोनभद्र में तैयार होने वाले गुलाब जामुन लंबे समय तक सुरक्षित रह सकेंगे और देश-विदेश के बाजारों तक आसानी से पहुंच पाएंगे।
उन्होंने बताया कि जिले में वर्तमान में गुलाब जामुन बनाने वाली 200 से अधिक इकाइयां संचालित हैं, जिनसे 300 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला हुआ है। ओडीओसी योजना में शामिल होने के बाद इस कारोबार के और विस्तार की संभावना है।
सोनभद्र के सुकृत क्षेत्र का गुलाब जामुन अपनी विशेष सुगंध और मुलायम स्वाद के लिए काफी प्रसिद्ध है। स्थानीय मिठाई व्यवसायी संतोष कुमार मोदनवाल ने बताया कि यह गुलाब जामुन मुख्य रूप से मैदा, खोवा और चीनी से तैयार किया जाता है। इसमें इलायची, केसर तथा काजू, पिस्ता और बादाम का मिश्रण भी निश्चित मात्रा में मिलाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और सुगंध इसे खास बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि इसकी नरम बनावट और विशिष्ट स्वाद के कारण यह मिठाई लोगों की पहली पसंद बनती जा रही है।

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