सहारनपुर में दलितों पर भी दिखा योगी का आकर्षण, अखिलेश के पीडीए पर सवाल
सहारनपुर, 8 मई (वार्ता) पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सहारनपुर जिला लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता रहा है। हरियाणा और उत्तराखंड की सीमाओं से लगे इस जिले में लगभग 40 प्रतिशत मुस्लिम आबादी के साथ-साथ दलित राजनीति का भी गहरा प्रभाव रहा है। कभी बहुजन समाज पार्टी और मायावती का मजबूत गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र में अब राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा के विस्तार का असर सहारनपुर सहित पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है। देवबंद में आयोजित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सभा में यह बदलाव खुलकर सामने आया, जहां विभिन्न जातीय समूहों की व्यापक भागीदारी देखने को मिली। कभी शहरी, वैश्य और ब्राह्मण वर्ग की पार्टी मानी जाने वाली भाजपा अब दलित और अन्य पिछड़े वर्गों में भी अपनी पकड़ मजबूत करती दिख रही है।
बसपा के प्रभाव वाले दलित समाज के प्रमुख नेताओं में शामिल हरोड़ा के पूर्व विधायक जगपाल सिंह तथा नांगल और रामपुर मनिहारान के पूर्व विधायक रविंद्र कुमार उर्फ मोल्लू अब भाजपा में सक्रिय हैं। दोनों नेता चमार समुदाय से आते हैं, जो क्षेत्र के दलित समाज में बड़ी संख्या में है। मुख्यमंत्री योगी की सभा में इन दोनों नेताओं की मंच पर मौजूदगी को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सहारनपुर जिले की सात विधानसभा सीटों में बेहट, सहारनपुर देहात, देवबंद, रामपुर मनिहारान और नकुड़ जैसी सीटों पर दलित मतदाताओं की भूमिका निर्णायक मानी जाती है। देवबंद विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम आबादी लगभग 39 प्रतिशत और दलित आबादी 22 से 23 प्रतिशत बताई जाती है। यहां महिलाओं, विशेषकर ग्रामीण दलित महिलाओं की सभा में उल्लेखनीय भागीदारी रही। कई महिलाओं ने बातचीत में कहा कि बसपा कभी दलितों की पार्टी रही हो, लेकिन अब भाजपा सरकार दलित कल्याण के लिए अधिक सक्रिय दिखाई देती है।
दूसरी ओर, योगी आदित्यनाथ की हिंदुत्ववादी राजनीति और तीखे बयानों को लेकर मुस्लिम समुदाय पहले की तुलना में अपेक्षाकृत शांत नजर आ रहा है। हालांकि जिले की सात में से दो सीटों बेहट और सहारनपुर ग्रामीण पर समाजवादी पार्टी के मुस्लिम विधायक उमर अली खान और आशु मलिक का प्रभाव कायम है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी को टिकट वितरण और स्थानीय गुटबाजी की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। नकुड़ और गंगोह सीटों पर भाजपा के भीतर भी टिकट को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ी हुई है।
इधर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख वैश्य नेता और सहारनपुर से तीन बार विधायक रहे संजय गर्ग के भाजपा में आने के बाद व्यापारी और वैश्य वर्ग में भाजपा की स्थिति और मजबूत मानी जा रही है। जिले में करीब एक लाख वैश्य और व्यापारी मतदाता प्रभावी भूमिका रखते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार लोकसभा चुनावों में विपक्षी गठबंधन से पिछड़ने के बावजूद भाजपा ने सहारनपुर में अपनी सामाजिक पकड़ बनाए रखी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की देवबंद सभा को भाजपा के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, जिसने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में बदलते सामाजिक समीकरणों की नई तस्वीर पेश की है।

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