योगी को “मूर्खमंत्री” कहने वाले कि गिरफ़्तारी पर रोक : उच्च न्यायालय


प्रयागराज, (दिनेश तिवारी) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही मे भीम आर्मी के नेता को गिरफ़्तारी से अंतरिम  राहत प्रदान की है |

उत्तर प्रदेश पुलिस ने भीम आर्मी भारत एकता मिशन (बरेली मण्डल ) के मण्डल उपाध्यक्ष सुधीर आर्यन  पर राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को “मूर्खमंत्री “कहने का आरोप लगते हुए एफआईआर दर्ज कराई है|

न्यायमूर्ति  राजीव मिश्रा और न्यायमूर्ति पदम नारायण मिश्रा  कि बेंच ने आरोपी सुधीर आर्यन को राहत दी है |

सुधीर आर्यन पर भारतीय न्याय संहिता 353 (2 ) (सार्वजनिक उपद्रव फैलाने वाले बयान) के तहत मामला दर्ज किया गया है | बेंच ने राज्य सरकार और याचिकर्ता को नोटिस जारी कर उनसे जवाब भी मांग |

एफआईआर के अनुसार, आरोपी याचिकर्ता भीम आर्मी भारत एकता मिशन (बरेली मंडल ) का मंडल उपयाध्यक्ष है | उसपर एक्स  (पहले ट्विटर) पर यह पोस्ट करने का आरोप हा, “ माननीय योगी आदित्यनाथ  जी मुख्यमंत्री हैं या मूर्ख मंत्री  |”

यह टिप्पणी उसने मुख्यमंत्री के उस बयान के संदर्भ में की  थी , जिसमे उन्होंने जनता को सलाह दी थी कि वे डीजल और पेट्रोल तभी खरीदें जब उन्हें इसकी जरूरत हो | एफआईआर रद्द करने कि मांग करते हुए आरोपी ने उच्च न्यायालय का रुख किया | उसके वकील ने दलील दी कि अगर एफआईआर मे लगाए गए आरोपों को हूबहू माँ भी लिया जय तो भी यह साफ है कि याचिकर्ता ने मुख्यमंत्री के चरित्र पर कोई लांछन नहीं लगाया |

वकील ने कहा कि आरोपी ने केवल एक ऐसे शब्द का इस्तेमाल किया, जो मुख्यमंत्री कि मानसिक स्थित मो दर्शाता है | एस करके उसने केवल  अपने अभिव्यक्ति के अधिकार का प्रयोग किया है| इन्ही अधरों पर वकील ने कहा कि आरोपी के खिलाफ आईपीसी कि धारा 505 / बी एन एस  कि धारा 353 (2 ) के तहत कोई अपराध बनता ही नहीं है|

दूसरी ओर, राज्य सरकार कि ओर से उपस्थित सरकारी वकील ने इस रित्याचीकाक विरोध करते हुए कहा कि इसमें एक संगेय अपराध (गंभीर अपराध) साफ तौर पर बंता है | हालांकि ,वे आरोपी के वकील द्वारा पेश कि गई तथ्यात्मक  और करुणा दलीलों को काट नहीं पाए | इसलिए मामले के तथ्यों और परिस्थितियों और साथ ही आरोपी के वकील कि दलीलों पर विचार करते हुए बेंच ने एक अंतरिम उपाय के तौर पर निर्देश दिया कि अगले आदेश तक इस मामले मे आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा |

इस मामले को 12 अगस्त को सुनवाई के लिए उचित बेंच  के सामने सूचीबद्ध किया गया | इसके साथ ही प्रतिवादियों को अपने अपने जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए 6 हफ्तों का समय दिया गया है |

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