ईवी बैटरी पुनर्चक्रण के लिए भारत और यूरोपीय संघ की संयुक्त पहल
नयी दिल्ली, 06 मई (वार्ता) भारत और यूरोपीय संघ ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी के पुनर्चक्रण को मजबूत बनाने के लिए 1.52 करोड़ यूरो (करीब 169 करोड़ रुपये) की संयुक्त पहल शुरू करने की घोषणा की है।भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय ने बुधवार को बताया कि भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) कार्य समूह-2 के हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी कार्य समूह-2 के ढांचे के अंतर्गत यह पहल शुरू की जा रही है। इसके लिए आमंत्रण की घोषणा 05 मई को की गयी थी और प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर है।
इस पहल का उद्देश्य महत्वपूर्ण कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करना, वैश्विक स्तर पर चक्रीय अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव को गति देना और भारत तथा यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है। कुल 1.52 करोड़ यूरो के संयुक्त वित्त पोषण के साथ यूरोपीय संघ के होराइजन यूरोप कार्यक्रम के माध्यम से इस पहल का वित्त पोषण किया जायेगा। भारी उद्योग मंत्रालय भारतीय घटक का समर्थन करेगा।
यह कार्यक्रम भारत में भारत-यूरोपीय संघ की संयुक्त पायलट लाइन की स्थापना में भी सहयोग करेगा। प्रस्ताव आमंत्रित करने की प्रक्रिया में उच्च रिकवरी दर; मिश्रित रसायन प्रबंधन; लॉजिस्टिक्स एवं समावेशन; और लिथियम, ग्रेफाइट एवं कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के लिए सुरक्षा तथा द्वितीयक जीवन पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा।
सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने कहा कि यह शुरुआत भारत-यूरोपीय संघ की रणनीतिक साझेदारी में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। देश के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार के तेजी से विस्तार के साथ एक मजबूत घरेलू पुनर्चक्रण प्रणाली का निर्माण हमारी संसाधन सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं के लिए आवश्यक है।
भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फ़िन ने हरित परिवर्तन के मूल में स्थित बैटरियों के महत्व पर प्रकाश डाला। इसका लक्ष्य विकास चरण से नवाचारों को वास्तविक दुनिया में लागू करना है; जिससे खनिज सुरक्षा और साझा जलवायु लक्ष्यों में प्रत्यक्ष निवेश हो सके।

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