सभी राजनीतिक दलों का दोहरा रवैया 'बहुत दुर्भाग्यपूर्ण' ; उच्चतम न्यायालय
नयी दिल्ली, 07 मई (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने सत्ता पक्ष और विपक्ष में शामिल राजनीतिक रवैये को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह 'बहुत दुर्भाग्यपूर्ण' है कि राजनीतिक दल जब विपक्ष में होते हैं तो स्वतंत्र चुनाव आयोग की मांग करते हैं लेकिन सत्ता में आते ही इस मुद्दे पर चुप हो जाते हैं या इसके विपरीत रवैया अपनाते हैं। विपक्षी दलों और सरकार (सत्तापक्ष) दोनों केन्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने गुरुवार को दुख जताया कि जो भी सत्ता में आता है, वही काम करता है और इसे देश के लिए "बहुत दुर्भाग्यपूर्ण" बताया।
न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा, "जो भी सत्ता में आता है, वही काम करता है। यह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।" न्यायमूर्ति दत्ता ने एक सांसद के 'बिना चुने हुए लोगों की तानाशाही' का जिक्र करते हुए कहा कि इसे 'चुने हुए लोगों की तानाशाही' के बराबर माना जाना चाहिए और न्यायमूर्ति शर्मा ने इसे 'बहुमत की तानाशाही' बताया।
पीठ ने ये बातें एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की तरफ से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण की दलीलों के दौरान कहीं। उन्होंने अदालत को बताया कि हर सरकार, चाहे सत्ता में कोई भी राजनीतिक पार्टी हो, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को नियंत्रित करने वाले कानून की कमी का फायदा उठाती है और उसका गलत इस्तेमाल करती है।

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