एफआईआर में अश्लील शब्दों व गालियों के हूबहू इस्तेमाल पर लगे लगाम : उच्च न्यायालय
प्रयागराज, (दिनेश तिवारी) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पीड़ित पक्ष की ओर से गुस्से में लिखी तहरीर में अश्लील शब्दों और गालियों को हूबहू लिखने पर कड़ी नाराजगी जताई है।
न्यायालय ने गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को परिपत्र (दिशानिर्देश) जारी कर एफआईआर में अश्लील शब्दों के प्रयोग पर तत्काल लगाम लगाने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की एकल पीठ ने बलिया के प्रेमशंकर राम की जमानत अर्जी खारिज करते हुए यह आदेश दिया है।
मामला बलिया में दर्ज मारपीट का है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि एफआईआर के अनुच्छेद 12 में बेहद आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। न्यायालय ने कहा कि डिजिटल युग में एफआईआर एक सार्वजनिक दस्तावेज है। इसे समाज का कोई भी नागरिकए महिला या पुरुष इंटरनेट पर पढ़ सकता है।
ऐसे में योग्य और शिक्षित पुलिस अधिकारियों की ओर से ऐसी संकीर्ण और अमर्यादित भाषा का प्रयोग एक सभ्य और लोकतांत्रिक समाज की छवि को धूमिल करता है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि कोई पीड़ित या शिकायतकर्ता अपनी तहरीर में अपशब्दों या गाली.गलौज का उल्लेख करता भी है तो पुलिस का कर्तव्य है कि वह एफआईआर दर्ज करते समय उन शब्दों को हूबहू लिखने से बचे। उनके स्थान पर रोजमर्रा की बोलचाल के सभ्य और सामान्य शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए। न्यायालय ने फैसले में मौजूदा मामले के अलावा बिजनौर , बस्ती , शामली , भदोही , वाराणसी और झांसी समेत कई जिलों की एफआईआर का हवाला भी दिया जहां ऐसी ही अभद्र भाषा पाई गई थी।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि रातों.रात सामाजिक बदलाव लाना कठिन हो सकता है लेकिन पुलिस प्रशासन को अधिक संवेदनशील और पेशेवर बनाने के लिए इस समस्या से कड़ाई से निपटना होगा।
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