पीसीएस-2024: यूपी की पारदर्शी परीक्षा प्रणाली बनी देशभर में भरोसे का प्रतीक
लखनऊ, 30 मार्च ( वार्ता) उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (पीसीएस-2024) के ताजा परिणामों ने न सिर्फ प्रदेश बल्कि पूरे देश में यूपी की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को मजबूत किया है।इस बार चयन सूची में उत्तर प्रदेश के साथ-साथ 10 अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों की सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पारदर्शिता और योग्यता आधारित चयन के कारण यूपी की परीक्षाएं अब राष्ट्रीय स्तर पर भरोसे का प्रतीक बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकसित “यूपी मॉडल” अब एक ऐसी व्यवस्था के रूप में उभर रहा है, जहां बिना किसी भेदभाव के प्रतिभा को अवसर मिलता है और मेहनत का सीधा परिणाम दिखाई देता है।
पीसीएस-2024 में कुल 932 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, जिनमें से 92.7 प्रतिशत (864) उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, जबकि 7.3 प्रतिशत (68) अभ्यर्थी अन्य राज्यों से हैं। बिहार, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, झारखंड, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के उम्मीदवारों की सफलता यह दर्शाती है कि यूपी की परीक्षा प्रणाली अब देशभर के युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है।
राज्यवार आंकड़ों में मध्य प्रदेश से 20, हरियाणा से 18, बिहार से 12 और दिल्ली से 9 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। अन्य राज्यों से भी अभ्यर्थियों की सफलता यह साबित करती है कि यूपी की परीक्षा प्रणाली पूरी तरह निष्पक्ष है, जहां सभी को बराबरी का अवसर मिलता है। इस बार के परिणामों में प्रदेश के 75 में से 74 जिलों के अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, जो अवसरों के व्यापक विस्तार को दर्शाता है।
लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर नगर, आगरा और अयोध्या जैसे प्रमुख शैक्षणिक केंद्र शीर्ष स्थानों पर रहे, वहीं संभल, कन्नौज, कासगंज, महोबा और फतेहगढ़ जैसे अपेक्षाकृत छोटे जिलों से भी सफलता की नई कहानियां सामने आई हैं।
टॉप 20 में 8 अभ्यर्थियों का ओबीसी वर्ग से होना सामाजिक समावेशन का मजबूत संकेत है। वहीं, टॉप 5 में 80 प्रतिशत महिला अभ्यर्थियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी अब नेतृत्व स्तर तक पहुंच रही है । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी अभ्युदय योजना का सकारात्मक प्रभाव भी इस परिणाम में दिखा है। इस योजना से जुड़े 43 अभ्यर्थियों ने पीसीएस-2024 में सफलता हासिल की है। निःशुल्क कोचिंग, मेंटरशिप और बेहतर संसाधनों की उपलब्धता ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवाओं को नई दिशा दी है।

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