जनगणना 2027 का प्रथम चरण एक अप्रैल से,सभी तैयारियां पूरी
नयी दिल्ली, 30 मार्च (वार्ता) सरकार ने जनगणना 2027 के पहले चरण में 11 राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्र में लोगों के घरों के सूचीकरण का काम एक अप्रैल से शुरू करने की तैयारी कर ली है।जनगणना के प्रथम चरण में अप्रैल से सितंबर के बीच देशभर में सभी राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में घरों की गणना की जाएगी। दूसरे चरण में व्यक्तियों से संबंधी सूचनाओं को एकत्र किया जाएगा। दूसरे चरण के कार्यक्रम की घोषणा बाद में की जाएगी। सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 11178 करोड रुपए का बजट स्वीकृत किया है।भारत के जनगणना महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने राजधानी में में जनगणना-2027 पर संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इस बार गणना में लोगों की जाती संबंधी गणना में की जाएगी। जनगणना अधिनियम 1948 के अनुसार लोगों की व्यक्तिगत सूचनाओं गोपनीय रखे जाएंगे और उनका किसी लाभ या अदालत आदमी प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। प्रौद्योगिकी का प्रयोग बड़े स्तर पर किया जा रहा है जिसमें लोग स्वयं की गणना भी कर सकेंगे। इसके लिए लोगों को अपने अपने क्षेत्र में जनगणना शुरू होने से 15 दिन पहले डिजिटल माध्यम से अपनी सूचनाओं को दर्ज करने का अवसर दिया जा रहा है , लेकिन हर हाल में गणित प्रत्येक घर में व्यक्तिगत रूप से जाकर सूचनाओं को एकत्रित करेंगे।
जनगणना आयुक्त ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी, जिसका पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा। पहली बार जनगणना डिजिटल रूप में आयोजित की जाएगी, और पहली बार 'स्व-गणना' (स्वयं गणना) का विकल्प भी उपलब्ध होगा।
पहली अप्रैल से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दिल्ली, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम में 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक स्व-गणना और 16 अप्रैल से 15 मई 2026 तक मकान सूचीकरण और आवास जनगणना आयोजित की जाएगी।
जनगणना का संचालन जनगणना अधिनियम, 1948 तथा जनगणना नियम, 1990 (समय-समय पर संशोधित) के प्रावधानों के अंतर्गत किया जाता है। पिछली जनगणना वर्ष 2011 में संपन्न हुई थी। जनगणना 2027 श्रृंखला की 16वीं तथा स्वतंत्रता के बाद 8वीं जनगणना होगी।
सरकार ने जनगणना 2027 आयोजित करने के आशय को 16 जून, 2025 को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया था।
जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि 1 मार्च, 2027 की 00:00 बजे होगी (लद्दाख संघ राज्य क्षेत्र तथा जम्मू-कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र एवं उत्तराखंड तथा हिमाचल प्रदेश राज्यों के हिमाच्छादित असमकालिक क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर, 2026 की 00:00 बजे होगी)।
जनगणना 2027 के पहले चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना ( एच एल ओ)
, जो अप्रैल से सितंबर, 2026 के दौरान राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्र की सुविधा के अनुसार 30 दिनों की अवधि में आयोजित की जा रही है। इसके साथ ही मकान सूचीकरण कार्य से पूर्व 15 दिनों की स्व-गणना (स्व गणना) की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इस चरण में मकानों की स्थिति, परिवारों को उपलब्ध सुविधाओं तथा उनके पास उपलब्ध परिसंपत्तियों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। पहले चरण के प्रश्न जनवरी 2026 में अधिसूचित किए जा चुके हैं।
इसके बाद दूसरे चरण में जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा (लद्दाख संघ राज्य क्षेत्र तथा जम्मू-कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र एवं उत्तराखंड तथा हिमाचल प्रदेश राज्यों के हिमाच्छादित असमकालिक क्षेत्रों में यह सितंबर 2026 में आयोजित होगा)।
मंत्रिमंडल के निर्णयानुसार, इस चरण में जातियों की गणना भी की जाएगी। इस चरण में प्रत्येक व्यक्ति से जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, शिक्षा, प्रवास, प्रजनन आदि से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। जनसंख्या गणना की सटीक तिथियां एवं प्रश्नावली समयानुसार अधिसूचित की जाएगी।
आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह, दिल्ली (नयी दिल्ली नगर पालिका परिषद एवं दिल्ली छावनी बोर्ड), गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा तथा सिक्किम में मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना 16 अप्रैल से 15 मई, 2026 के बीच आयोजित होगी, तथा 1 अप्रैल से 15 अप्रैल, 2026 तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध होगी। मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़ एवं हरियाणा में यह कार्य 1 मई से 30 मई, 2026 तक होगा तथा 16 अप्रैल से 30 अप्रैल, 2026 तक स्व-गणना की अवधि रहेगी।
सरकार ने जनगणना 2027 के लिए ₹11,718.24 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की है, जिसमें प्रगणकों के मानदेय, प्रशिक्षण, आईटी अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स आदि के लिए पर्याप्त प्रावधान किया गया है।
जनगणना 2027 को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा। प्रगणक मोबाइल ऐप के माध्यम से अपने स्मार्टफोन द्वारा सीधे डेटा एकत्र एवं प्रस्तुत करेंगे। इसके अतिरिक्त, दोनों चरणों में स्व-गणना के लिए ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध होगी। मोबाइल ऐप एवं स्व-गणना पोर्टल हिंदी एवं अंग्रेज़ी सहित 16 भाषाओं में उपलब्ध होंगे। जनगणना से संबंधित विभिन्न गतिविधियों जैसे— प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों के नियुक्ति पत्र एवं पहचान पत्र का निर्माण, कार्य आवंटन, प्रशिक्षण प्रबंधन, एच एल बी निर्माण, डैशबोर्ड के माध्यम से कार्य की निगरानी, कुछ जनगणना अभिलेखों/सारांशों का स्वतः निर्माण आदि के लिए एक पोर्टल विकसित किया गया है। मकानसूचीकरण ब्लॉक, एच एल बी वेब मैपिंग एप्लिकेशन के माध्यम से तैयार किए जाएंगे। डेटा सुरक्षा हेतु आवश्यक सभी उपाय किए गए हैं।
जनगणना आयुक्त ने बताया कि स्व-गणना के लिए, व्यक्ति अपने मोबाइल नंबर एवं अन्य मूलभूत विवरणों के माध्यम से पोर्टल में लॉग-इन कर अपनी सुविधा अनुसार जनगणना प्रपत्र भर सकते हैं। सफल सबमिशन के पश्चात एक विशिष्ट स्व-गणना आईडी (एस आईडी ) प्राप्त होगी, जिसे प्रगणक के साथ साझा करना होगा। स्व-गणना सुविधा से लोगों को प्रगणक के आगमन से पूर्व अपनी सुविधा अनुसार जानकारी भरने की स्वतंत्रता मिलेगी। पूर्व की भांति प्रगणक अपने आवंटित ब्लॉकों में घर-घर जाकर गणना करेंगे, जबकि स्व-गणना इस बार एक अतिरिक्त सुविधा के रूप में प्रदान की गई है।
जानगणना वहां पंजीयन एवं जनगणना आयुक्त की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार स्व गणना के लिए एसई पोर्टल पर मोबाइल नंबर के साथ लॉगिन करनी पड़ेगी। इस माध्यम से जानकारी देने वाले व्यक्ति को जनसंख्या प्रगणक के साथ स्व गणनाआईडी देनी होगी। डेटा को पुष्टि कर जनगणना में सम्मिलित किया जाएगा।
जनगणना के प्रथम चरण (एच एल ओ) का पूर्व-परीक्षण नवंबर 2025 में सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में लगभग 5000 ब्लॉकों में किया गया। इसमें गणना पद्धति, नियुक्ति एवं प्रशिक्षण, प्रश्नावली, ऐप एवं पोर्टल सहित डेटा संग्रहण से लेकर प्रसंस्करण तक सभी गतिविधियों का परीक्षण किया गया।
श्री नारायण ने बताया कि पहली जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक सभी प्रशासनिक इकाइयों को स्थिर (फ्रीज़) कर दिया गया है। जनगणना 2027 का संचालन 36 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों, 7,092 उप-जिलों, 5,128 सांविधिक नगरों, 4,580 जनगणना नगरों तथा लगभग 6,39,902 गांवों में किया जाएगा।
जनगणना अधिकारियों के प्रशिक्षण हेतु व्यापक व्यवस्था की गई है। 100 राष्ट्रीय प्रशिक्षकों को विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित किया गया है, जिन्होंने लगभग 2000 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया है। ये मास्टर ट्रेनर्स लगभग 45,000 फील्ड ट्रेनर्स को प्रशिक्षित कर रहे हैं, जो आगे लगभग 31 लाख प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को लगभग 80,000 बैचों में प्रशिक्षण देंगे। सभी प्रशिक्षण सामग्री क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार की गई है ताकि अंतिम स्तर पर कार्यरत प्रगणक एवं पर्यवेक्षक समय पर गुणवत्तापूर्ण डेटा एकत्र कर सकें।

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