देश में उर्वरक , पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार: सरकार
नयी दिल्ली 29 मार्च (वार्ता) पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर तरह-तरह की आशंकाओं और अटकलों को खारिज करते हुए सरकार ने कहा है कि इस संकट के बावजूद देश में उर्वरकों , पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार है और वह स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है।
उर्वरक की उपलब्धता, उत्पादन, आयात और परिवहन की निरंतर निगरानी के लिए एक आकस्मिक "वार रूम" स्थापित किया गया है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखी जाएगी और किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।
पश्चिम एशिया की स्थिति पर अंतर मंत्रालय ब्रीफिंग में सोमवार को संबंधित मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि देश में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध और किसानों को पहले की तरह समान कीमतों पर आपूर्ति दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि यूरिया इकाइयों को गैस आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए अनेक उपाय किए गए हैं और उर्वरकों की आपूर्ति को कई देशों से विविधीकृत किया जा रहा है। इसके साथ ही उर्वरक की अवैध निकासी, कालाबाजारी और जमाखोरी की भी कड़ी निगरानी की जा रही है। रसोई गैस के मोर्चे पर कंपनियां घरेलू और वाणिज्यिक पीएनजी कनेक्शनों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन दे रही हैं उद्योग स्तर पर ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग लगभग 95 प्रतिशत तक बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि पिछले एक सप्ताह में 5 किलोग्राम के 2.6 लाख से अधिक एफटीएल सिलेंडर बेचे गए हैं, जिनमें से पिछले 2 दिनों में 88,000 से अधिक प्रवासी श्रमिकों को दिये गये।
पिछले 24 घंटों में देश भर में 2,500 से अधिक छापे मार कर 2,000 से अधिक सिलेंडर जब्त किए गए हैं।
पश्चिम एशियाई देशों से उडानों की स्थिति में सुधार जारी है और 28 फरवरी से अब तक लगभग 5,50,000 यात्री स्वदेश लौट चुके हैं।
सरकार ने कहा है कि खाड़ी क्षेत्र उर्वरक आयात का एक प्रमुख स्रोत बना हुआ है जहां से यूरिया आयात का 20 से 30 प्रतिशत और डीएपी आयात का 30 प्रतिशत आता है । देश के एलएनजी आयात का लगभग 50 प्रतिशत भी यहीं से आता है, जो यूरिया उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों के कारण यूरिया का घरेलू उत्पादन प्रभावित हुआ है। उर्वरक विभाग इस प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठा रहा है।
सरकार ने कहा कि आगामी खरीफ 2026 सीजन के लिए कुल आवश्यकता लगभग 390 लाख टन अनुमानित है, जबकि खरीफ 2025 में वास्तविक बिक्री 361 लाख टन थी।उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में वर्तमान में पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। अधिकारियों ने कहा कि कुल स्टॉक लगभग 180 लाख टन है, जबकि पिछले वर्ष यह 147 लाख टन था।
सरकार ने कहा कि यूरिया संयंत्रों को गैस आपूर्ति, जो प्रारंभ में लगभग 60 प्रतिशत तक कम हो गई थी, उसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 65 प्रतिशत और फिर वैकल्पिक व्यवस्थाओं के माध्यम से 75 से 80 प्रतिशत तक किया गया है। इससे यूरिया उत्पादन में प्रतिदिन 12,000–15,000 टन की वृद्धि हुई है और मासिक उत्पादन हानि 9 से 10 लाख टन से घटकर लगभग 6 से 7 लाख टन रह गई है। इन उपायों से यूरिया इकाइयों को गैस आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित हुई है और उपयुक्त रणनीतियाँ अपनाने के लिए समय मिला है।
अधिकारियों ने कहा कि मार्च में घरेलू उत्पादन यूरिया के लिए लगभग 18 लाख टन और पी एंड के उर्वरकों के लिए 9 से10 लाख टन रहा, जबकि गत मार्च में यह क्रमशः 24.78 लाख टन और 11.90 लाख टन था।
सरकार ने वैश्विक उपलब्धता का आकलन करने, आपूर्ति स्रोतों की पहचान करने और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आयात की योजना बनाने हेतु एक विशेष कार्य समूह गठित किया गया है। कुल 13.07 लाख टन यूरिया के आयात के लिए वैश्विक निविदा पहले ही फरवरी के मध्य में जारी की जा चुकी है। आपूर्ति व्यवस्थाओं में रूस से केप ऑफ गुड होप मार्ग के माध्यम से लगभग 28 लाख टन शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि रूस, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, जॉर्डन, कनाडा, अल्जीरिया, मिस्र, फिनलैंड और टोगो सहित कई देशों से स्रोतों को विविधीकृत किया जा रहा है।
सरकार ने कहा है कि उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर किसी भी प्रकार की घबराहट से बचने के लिए राज्यों को जागरूक किया गया है। रसायन और उर्वरक मंत्री ने 10 मुख्यमंत्रियों और 12 राज्य कृषि मंत्रियों से इस विषय पर चर्चा की। इसके अलावा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत उर्वरकों की अवैध निकासी, कालाबाजारी और जमाखोरी पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
उर्वरक विभाग वैश्विक कीमतों के रुझानों पर कड़ी निगरानी रख रहा है और आगामी खरीफ सीजन के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी दरों पर उपयुक्त निर्णय करेगा। अभी देश में सभी प्रकार के उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और आगामी 2.5 महीनों में किसी भी उर्वरक की बड़ी आवश्यकता नहीं है।इसके साथ ही उर्वरक की उपलब्धता, उत्पादन, आयात और परिवहन की निरंतर निगरानी के लिए एक आकस्मिक "वार रूम" स्थापित किया गया है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखी जाएगी और किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।
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