नीट पेपर लीक पर छात्रसंघ का प्रदर्शन


प्रयागराज, (दिनेश तिवारी) नीट परीक्षा मे कथित अनियमित्ताओं  और हालिया पेपर लीक के विरोध मे छात्रसंघ  इलाहाबाद विश्वविद्यालय  के छात्रों ने मंगलवार  को सड़कों पर उतरकर सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के खिलाफ नारेबाजी की | छात्रों ने विश्वविद्यालय यूनियन गेट से मार्च निकालकर जिलाधिकारी कार्यालय की  ओर रुख किया और केंद्र सरकार से दोषियों के खिलाफ कडा कदम उठाने कि मांग की |

 प्रदर्शन के दौरान छात्रों के हाथों मे की तख्तियाँ और पोस्टर थे | जिन पर नौकरी नहीं , पेपर लीक का जाल और धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा दो जैसे नारे लिखे हुए थे| प्रदर्शनकारी छात्रों और नेताओं ने आरोप लगाए कि पेपर लीक  रैकेट मे की नाम राजनीतिक दलों, खासकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा ) से जुड़े हैं|

पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष आदिल हमज ने कहा कि सालभर मेहनत करने वाले  लाखों प्रतियोगी छात्रों का भविष्य कुछ पैसों मे बेच दिया जा रहा है| उन्होंने कहा कि यदि कोई प्रतियोगी छात्र आपने  माता-पिता के सपनों को साकार करने के लिए त्याग करते  है, तो अंत मे पता चलता है कि उसका भविष्य  30-40 लाख रुपए मे बिक गया | हालिया पेपर लीक ने होनहार  छात्रों कि मेहनत पर पानी फेर दिया है और दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए | आज देश मे पेट्रोल , डीजल  , और घरेलू गैस के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे आम जनता और छात्रों का बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है |

 छात्र नेता संदीप विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि नीट पेपर लीक मामले मे जितने नाम सामने आ  रहे हैं , कहीं न कहीं भाजपा  से जुड़े हुए हैं| उन्होंने दिनेश बिवाल का नाम लेते हुए कहा कि वो भाजपा के नेता रह हैं और इस पूरे रैकेट  मे शामिल अधिकांश लोगों के संबंध सीधे तौर पर सत्ताधारी दल से हैं| प्रदीप जोशी एबीवीपी  के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं और संघ के लोगों ने उनकी पैरवी की  थी | वे इससे पहले जहां भी रहे --चाहे छत्तीसगढ़ पीसीएस हो या मध्य प्रदेश पीसीएस, उनके कार्यकाल मे हर जगह पेपर लीक के मामले सामने आए | इसके बावजूद सरकार इस पूरे मामले को दबाने कि कोशिश कर रही है |

उन्होंने कहा कि जब भी छात्र अपने रोजगार या हक कि आवाज बुलंद करते हैं , तो सरकार लठियों के दम पर उनके दमन का प्रयास करती है | जो विपक्ष मे रहते हुए छोटी –छोटी  बातों पर दूसरों का इस्तीफा मांगते थे, वे आज इतनी बड़ी धांधली के बाद भी अपने पद पर बने हुए हैं और इस्तीफा नहीं दे रहे हैं|

छात्र नेता अनुराग चौरसिया ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था के तेज व्यावसाइकरण  कि कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इससे गरीब व मध्यमवर्गीय छात्रों के सपने कुचले जा रहे हैं| उन्होंने प्रवेश परीक्षाओं की बढ़ती फीस   पर सवाल उठाते हुए पूछा  कि एक किसान या मजदूर का बच्चा इतनी राशि कहाँ से लाएगा|  शीर्ष नेतृत्व कि नीतियों को युवा- संवेदनहीन करार देते हुए अनुराग ने कहा कि स्पषट  योजनों कि कमी के चलते युवा बेरोजगारी व मंहगी  शिक्षा के शिकार हैं|

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