यूपी में एक जुलाई से स्कूल बसों की होगी सघन जांच, 40 किमी/घंटा से अधिक रफ्तार पर सख्त कार्रवाई


लखनऊ, 28 जून (वार्ता) उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग 1 जुलाई से राज्यव्यापी विशेष जांच अभियान शुरू करेगा। यह अभियान 31 जुलाई तक चलेगा, जिसके दौरान स्कूल बसों की फिटनेस, सुरक्षा उपकरणों और आवश्यक दस्तावेजों की व्यापक जांच की जाएगी।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क पर चल रही प्रत्येक स्कूल बस निर्धारित सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करे। इसके लिए सभी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं।
अभियान के दौरान बसों के फिटनेस प्रमाणपत्र और तकनीकी स्थिति की जांच की जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि बसों में स्पीड गवर्नर सही तरीके से कार्य कर रहा है या नहीं, क्योंकि स्कूल वाहनों की अधिकतम निर्धारित गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा है।
इसके अलावा प्रत्येक बस में फायर एक्सटिंग्विशर, इमरजेंसी एग्जिट और अन्य आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं की उपलब्धता एवं कार्यशील स्थिति की भी जांच होगी। बस चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस, पहचान और अन्य जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन भी किया जाएगा।
साथ ही वाहन का पंजीकरण प्रमाणपत्र , परमिट, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र और फिटनेस सर्टिफिकेट की वैधता की भी पड़ताल की जाएगी। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर संबंधित वाहन का चालान किया जाएगा। गंभीर खामियां पाए जाने पर बस को सीज करने, फिटनेस प्रमाणपत्र निलंबित या निरस्त करने जैसी कठोर कार्रवाई भी की जा सकती है।
विभाग का कहना है कि कई बार स्कूल बसों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और ओवरस्पीडिंग जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। इसी को देखते हुए एक माह का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन को पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं कि वे अपनी सभी बसों का रखरखाव समय रहते पूरा कर लें और यह सुनिश्चित करें कि 1 जुलाई से सड़क पर उतरने वाला प्रत्येक स्कूल वाहन निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो।

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