जी-7 : अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत द्वीप देशों के साथ व्यापार बढाने के लिये 'कनेक्टिविटी 'पर मोदी का जोर


नयी दिल्ली ,17 जून (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी-7 देशों से अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत द्वीप देशों के साथ व्यापार बढाने के लिए एक 'कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट' 'इंटरनेशनल मोबिलाइज़ेशन पार्टनरशिप फॉर एक्सेलरेटिंग कनेक्टिविटी एंड ट्रेड' (इम्पेक्ट) बनाने का सुझाव दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को फ्रांस के एवियन शहर में जी-7 देशों के 52 वें शिखर सम्मेलन में भागीदार देश के रूप में 'सभी के लिए संतुलित, साझा और टिकाऊ आर्थिक विकास ' विषय पर आउटरीच सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कई देशों में बुजुर्गों की आबादी निरंतर बढ रही है जबकि विकासशील देशों में युवा प्रतिभा और कौशल है उन्होंने कहा कि इस स्थिति का लाभ उठाने के लिए 'ग्लोबल स्किल्स पार्टनरशिप' बनायी जा सकती है।
श्री मोदी ने कहा कि इम्पेक्ट प्रोजेक्ट भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईमैक ) की तर्ज पर बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जी-7 की पूंजी, भारत की प्रतिभा और ग्लोबल साउथ के देशों की भागीदारी को मिलाकर यह कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट बनाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने सत्र में भाग लेने के बाद सोशल मीडिया पर सिलसिलेवार पोस्ट में कहा , " एवियन में जी 7 समिट में 'सभी के लिए संतुलित, साझा और टिकाऊ आर्थिक विकास पर आउटरीच सेशन' को संबोधित किया। यह अच्छी बात है कि जी- 7 ने फ्रांस की अध्यक्षता में इस विषय को महत्व दिया है। आज सच्चाई यह है कि जब विकास की बात आती है, तो सवाल जीडीपी या व्यापार के आंकड़ों के बारे में नहीं होना चाहिए।असली सवाल यह है - विकास किसके लिए, किसके साथ और किस दिशा में?" श्री मोदी ने कहा ," आइमेक के विज़न की तरह, क्या हम अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत द्वीप देशों के साथ कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकते हैं?
जी 7 की पूंजी, भारत की प्रतिभा और ग्लोबल साउथ के देशों की भागीदारी को मिलाकर, हम कनेक्टिविटी और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक 'इंटरनेशनल मोबिलाइज़ेशन पार्टनरशिप फॉर एक्सेलरेटिंग कनेक्टिविटी एंड ट्रेड' (इम्पेक्ट) बनाने पर भी विचार कर सकते हैं।"
दुनिया के कई देशों में बुजुर्गों की आबादी बढने और विकासशील देशों में युवा प्रतिभा तथा कौशल की भरमार का मिलकर फायदा उठाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा , " आज, कई समाज 'एजिंग सोसाइटी' (बूढ़ी होती आबादी वाले समाज) बन रहे हैं, जबकि भारत और ग्लोबल साउथ के अन्य देशों में युवा प्रतिभा, उद्यमिता और कौशल की प्रचुरता है। इस स्वाभाविक पूरकता की स्थिति का लाभ उठाने के लिए, एक 'ग्लोबल स्किल्स पार्टनरशिप' बनाने का आह्वान किया, जहाँ हम स्किल मैपिंग और भरोसेमंद कुशल लोगों की आवाजाही को बढ़ावा देने पर मिलकर काम कर सकें।"

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