प्रकृति के हर जीव को जिज्ञासु विद्यार्थी की तरह परखें : योगी
लखनऊ, 8 जून (वार्ता) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी चिट्ठी के जरिए प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे प्रकृति के बीच जाएं तो केवल पर्यटक बनकर न जाएं, बल्कि जिज्ञासु विद्यार्थी की भांति वहां के जीव-जंतुओं और पर्यावरण को समझें।उन्होंने कहा कि जैव विविधता का संरक्षण तभी सफल होगा जब जनभागीदारी बढ़ेगी और खासकर युवा इसे अपना विषय बनाएं। मुख्यमंत्री ने रविवार को जारी अपने पत्र में लिखा कि वर्षा ऋतु में कीट-पतंगों की आवाज, गर्मियों की रातों में जुगनुओं की चमक, भोर में गौरैयों की चहचहाहट और पेड़ों पर मैना का कलरव, जो कभी दैनिक जीवन का हिस्सा थे, आज शहरों में लगभग दुर्लभ हो चुके हैं। इनकी लुप्तप्राय स्थिति चिंताजनक है और जीवन के लिए खतरे का सूचक है।
उन्होंने कहा कि आधुनिकता आवश्यक है, पर प्रकृति से विमुख होकर नहीं। जीव-जंतु प्रकृति के सौंदर्य का प्रतीक मात्र नहीं, बल्कि स्वस्थ पर्यावरण का श्रृंगार हैं। फसल उत्पादन से लेकर खाद्य श्रृंखला तक, प्रकृति के वृहत चक्र में प्रत्येक जीव की महत्वपूर्ण भूमिका है।
योगी ने सनातन संस्कृति का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें प्रकृति के प्रत्येक जीव को सृष्टि का अभिन्न अंग माना गया है। त्रिलोक में अजेय माने जाने वाले दशानन का संहार करने वाली प्रभु श्रीराम की सेना में वानर से लेकर ऋक्ष, जटायु और नन्ही गिलहरी तक का योगदान था। यह मानव, प्रकृति तथा विभिन्न जीव-जंतुओं के परस्पर आश्रित रहने का परिचायक है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 9 वर्ष पूर्व जब उन्होंने कार्यभार संभाला, तब पर्यावरण संरक्षण को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया गया। वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन के सतत प्रयासों का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश में बाघों, तेंदुओं और राज्य पक्षी सारस की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित आर्द्रभूमियों की रामसर सूची में प्रदेश के 13 स्थलों ने जगह बनाई है। एक समय जिन जीवों और पक्षियों को उत्तर प्रदेश से विलुप्त माना जा रहा था, वे अब फिर से दिखाई देने लगे हैं। योगी ने कहा कि तराई के घास के मैदानों में अत्यंत दुर्लभ बर्ड्स बैंबलर पक्षी वर्षों बाद दिखाई दिया। दुधवा टाइगर रिजर्व में पेंटेड कीलबैक नामक दुर्लभ सर्प की मौजूदगी 117 वर्ष बाद दर्ज की गई।
योगी ने युवाओं से विशेष आग्रह किया कि जब भी प्रकृति के बीच जाने का अवसर मिले, तो उस स्थल को केवल घूमने की जगह न समझें। प्रकृति का जीवंत संसार आपको इसके अनछुए रूपों से भी परिचित करा सकता है। अपने अनुभवों को व्लॉग और आलेखों के माध्यम से साझा करें। ग्रीष्मावकाश के दौरान बच्चे इन्हें अपने स्कूली प्रोजेक्ट का विषय बनाएं।
उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति जागरूकता और अपनापन ही हमारी जैव विविधता के सबसे बड़े संरक्षक हैं। पत्र के अंत में सीएम योगी ने ‘जैव विविधता हमारी सुरक्षा’ का संदेश देते हुए प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

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