क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र विकसित भारत की संकल्पना को वैज्ञानिक आधार देगा : योगी


लखनऊ, 08 जून (वार्ता) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की स्थापना मौसम पूर्वानुमान और अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो उत्तर प्रदेश के माध्यम से विकसित भारत की संकल्पना को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री ने सोमवार को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ बटन दबाकर क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में मौसम विज्ञान और पूर्व चेतावनी प्रणाली के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है और मात्र 11 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि पर देश का लगभग 21 प्रतिशत खाद्यान्न उत्पादन करता है। ऐसे में किसानों को समय पर मौसम, वर्षा, अतिवृष्टि, अनावृष्टि और ओलावृष्टि की सटीक जानकारी उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व चेतावनी प्रणाली (अर्ली वार्निंग सिस्टम) के माध्यम से प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जनधन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी आई है, जिसका श्रेय मौसम विभाग की सटीक चेतावनी प्रणाली को जाता है।
योगी ने सहारनपुर स्थित मां शाकंभरी देवी क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि समय रहते मौसम संबंधी जानकारी मिलने के कारण संभावित आपदा के दौरान बड़ी जनहानि टाली जा सकी। उन्होंने कहा कि मौसम विभाग की सटीक भविष्यवाणी आपदा प्रबंधन में बेहद उपयोगी साबित हो रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मौसम संबंधी और अधिक सटीक जानकारी के लिए अपना उपग्रह (सैटेलाइट) स्थापित करना चाहती है। इस संबंध में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) से भी चर्चा की गई है। उन्होंने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश के लिए विशेष सैटेलाइट स्थापित होता है तो राज्य सरकार हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम चक्र में लगभग एक माह का परिवर्तन देखने को मिल रहा है, जिससे भविष्य में खाद्यान्न उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। ऐसे में मौसम संबंधी सटीक जानकारी किसानों और नीति निर्माताओं दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 450 ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन तथा ब्लॉक स्तर पर लगभग 2,000 ऑटोमेटिक रेनगेज स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त आजमगढ़, वाराणसी, अलीगढ़, झांसी और लखनऊ में एक्स-बैंड डॉप्लर वेदर राडार स्थापित किए जा रहे हैं, जो आंधी, तूफान, भारी वर्षा और ओलावृष्टि की निगरानी में सहायक होंगे।
उन्होंने कहा कि मौसम विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सटीक जानकारी का लाभ किसानों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों और आम नागरिकों को मिल रहा है तथा इससे जनधन की हानि को कम करने में मदद मिली है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के प्रति आभार व्यक्त किया।
प्रदीप

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