गडकरी ने आत्मनिर्भरता के लिए वैकल्पिक ऊर्जा को बताया जरूरी, किया पहली फ्लैक्स ईंधन कार का अनावरण
नयी दिल्ली, 04 जून (वार्ता) सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि भारत को ईंधन क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करनी होगी और इसके लिए एथेनॉल, हाइड्रोजन तथा अन्य वैकल्पिक ईंधनों को बड़े पैमाने पर अपनाने की जरूरत है।
श्री गडकरी ने गुरुवार को वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी द्वारा देश की पहली फ्लैक्स फ्यूल कार के अनावरण समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि फ्लैक्स ईंधन वाहन किसानों, पर्यावरण और देश की अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी हैं तथा इनके व्यापक उपयोग से प्रदूषण कम करने के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि उनके पास परिवहन मंत्रालय है और उन्हें इस बात पर गहरा दुख है कि देश में लगभग 30 प्रतिशत वायु प्रदूषण के लिए परिवहन क्षेत्र जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि देश आर्थिक रूप से तभी मजबूत होगा जब देश ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति के कारण भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा आटोमोबाइल क्षेत्र बन चुका है।
श्री गडकरी ने कहा कि वैकल्पिक ऊर्जा विकास का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है और मारुति सुजुकी द्वारा पेश की गई नई फ्लेैक्स फ्यूल कार एथेनॉल के साथ-साथ विद्युत ऊर्जा पर भी चलने में सक्षम है। इससे वाहन उत्सर्जन में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। यह पहल सतत एवं आत्मनिर्भर परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने तथा 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
श्री गडकरी ने कहा कि सरकार लंबे समय से एथेनॉल आधारित ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और प्रदूषण घटाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि फ्लैक्स फ्यूल तकनीक हरित एवं टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने बताया कि देश में करीब 175 वाहन स्क्रैपिंग केंद्र संचालित हो रहे हैं, जहां अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को हटाने का काम किया जा रहा है। इससे प्रदूषण नियंत्रण और सड़क सुरक्षा दोनों को लाभ होगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन है और उनकी स्वयं की हाइड्रोजन आधारित कार 'मिराई' इसका उदाहरण है। उन्होंने बताया कि जापानी भाषा में 'मिराई' का अर्थ 'भविष्य' होता है। उन्होंने कहा कि देश की सड़कों पर अब हाइड्रोजन बसें भी दिखाई देने लगी हैं और पायलट परियोजना के तहत दस मार्गों पर हाइड्रोजन से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि फ्लैक्स फ्यूल, एथेनॉल, इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन आधारित वाहनों के बढ़ते उपयोग से भारत स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों को तेजी से हासिल कर सकेगा।
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