लखनऊ अग्निकांड प्रदेश के लिए बड़ा सबक, फायर सेफ्टी मानकों से समझौता नहीं: योगी


लखनऊ, 23 जून (वार्ता) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए अग्निकांड को प्रदेश के लिए एक बड़ा सबक बताते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अग्नि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने प्रदेश के सभी जनपदों में मिशन मोड में व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

मंगलवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित विशेष समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पतालों, नर्सिंग होमों, मेडिकल कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों, शॉपिंग मॉल, सरकारी भवनों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाए। प्रत्येक जनपद में विशेष टीमों का गठन कर सुरक्षा मानकों की जांच सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अभियान पूरी तरह जनहित में संचालित होगा। पहले व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए और उसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के नाम पर किसी भी नागरिक का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सभी कोचिंग संस्थानों का विधिवत पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए तथा व्यावसायिक भवनों में अग्निशमन विभाग से प्राप्त अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए। सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
योगी ने भवन उपयोग के संबंध में भी सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिस भवन अथवा भूमि को जिस उद्देश्य के लिए स्वीकृति प्रदान की गई है, उसका उपयोग उसी कार्य के लिए होना चाहिए। आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि किसी भी स्थिति में बेसमेंट में कोचिंग संस्थान, नर्सिंग होम अथवा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि बेसमेंट पार्किंग के लिए स्वीकृत है तो उसका उपयोग केवल पार्किंग के लिए ही होना चाहिए।
उन्होंने व्यावसायिक भवनों के विद्युत भार (लोड) का पुनर्मूल्यांकन कराने के निर्देश देते हुए कहा कि जहां निर्धारित मानकों के विपरीत विद्युत भार पाया जाए या अन्य नियमों का उल्लंघन हो रहा हो, वहां तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए।
बैठक में मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक, महानिदेशक अग्निशमन सेवा, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा एसडीआरएफ अधिकारियों से लखनऊ अग्निकांड की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों की बिंदुवार समीक्षा करते हुए आपातकालीन सेवाओं के रिस्पॉन्स टाइम को और कम करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपातकालीन सेवाओं का रिस्पॉन्स टाइम जितना कम होगा, संकट की घड़ी में राहत और बचाव कार्य उतने ही प्रभावी होंगे। इसके लिए सभी एजेंसियां उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करें और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएं।
बैठक में अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही 14 एम्बुलेंस तत्काल घटनास्थल पर भेजी गई थीं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों, सरकारी एवं निजी अस्पतालों तथा स्वास्थ्य संस्थानों का फायर सेफ्टी ऑडिट प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए।
मुख्यमंत्री ने हाल ही में नई दिल्ली में हुई अग्नि दुर्घटना का उल्लेख करते हुए प्रदेश में अग्निशमन सेवाओं की उपलब्धता और संसाधनों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि अग्निशमन विभाग को आधुनिक उपकरणों, संसाधनों और तकनीकी सुविधाओं से सुसज्जित करने में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।
बैठक में महानिदेशक अग्निशमन सेवा ने बताया कि प्रदेश की 350 तहसीलों में से 296 तहसीलों में 326 स्थायी अग्निशमन केंद्र संचालित हैं। 26 नए अग्निशमन केंद्र लोकार्पण के लिए तैयार हैं, जबकि 25 केंद्रों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त 47 नए केंद्रों के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने शेष तहसीलों में भी अग्निशमन सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। सभी विभागों को समन्वित प्रयासों के साथ कार्य करते हुए प्रदेश में सुरक्षित और उत्तरदायी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।

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