प्रयागराज, ( दिनेश तिवारी)गार्डनिंग (बगवानी )के क्षेत्र में रोजगार की है अपार संभावनाएं हैं जिसमे कम लागत से एक बड़ा व्यवसाय खड़ा मिया जा सकता है। मुख्य उद्यान विशेषज्ञ डॉ वीरेंद्र सिंह ने मंगलवार को औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र खुसरोबाग प्रयागराज में एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना अंतर्गत आयोजित माली (गार्डनर) प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को गार्डनिंग के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं पर जानकारी देते हुए कहा की यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें कम लागत से एक बहुत बड़ा व्यवसाय स्थापित किया जा सकता है। डॉ सिंह ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए बताया कि नए गार्डन का विकास, पुष्प व्यवसाय, नर्सरी का व्यवसाय, किचन गार्डन, के अलावा बहुत से क्षेत्र ऐसे हैं जो उद्यान से जुड़े हुए हैं। प्रतिभागी तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर अपना रोजगार प्रारंभ कर सकते हैं। प्रशिक्षण के तकनीकी सत्र में अजय श्रीवास्तव उपाध्यक्ष सरला स्मृति संस्थान लखनऊ द्वारा जैविक खाद के उत्पादन तथा उनके भंडारण पर जानकारी देते हुए बताया कि औद्योगिक फसलों विशेष रूप से फूल , फल , सब्जी आदि के पौधों के लिए वर्...
सहारनपुर, 05 फरवरी (वार्ता) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव में पार्टी की ओर से सभी समाज के लोगों को टिकट दिये जाने का दावा करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) पर मुसलमानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। सुश्री मायावती ने शनिवार को सहारनपुर में सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए मुस्लिम समाज से पूछा, “उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार हटने पर भाजपा के सत्ता में आने के बाद मुसलमानों ने सपा का सबसे ज्यादा साथ दिया, यह सबको मालूम है, लेकिन उसके बदले में मुस्लिम समाज को सपा से क्या मिला? मुस्लिम समाज के लोगों से मैं यह पूछना चाहती हूं कि सपा ने उत्तर प्रदेश में कितने टिकट मुस्लिम समाज के लोगों को दिये।” बसपा प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार करने यहां पहुंची पार्टी सुप्रीमाे ने सपा पर मुजफ्फरनगर कांड की आड़ में पश्चिमी उत्तर प्रदेश का भाईचारा खत्म करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह घटना पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हुए दंगे का सबसे बड़ा उदाहरण है। सुश्री मायावती ने कहा कि मुजफ्फरनगर कांड में जाटवों के साथ-साथ मुस्लिम समुदाय को भी जान माल का बहु...
अमिताभ स. 'सफलता और असफलता में से किसी एक का पलड़ा भारी नहीं है, क्योंकि सीखते हम दोनों से हैं।Ó कहना है, इसरो के पूर्व प्रमुख व जाने-माने वैज्ञानिक डॉ. के. सिवन का। सच है कि जीत या सफलता एक मन:स्थिति है। लेकिन कुछ हासिल करना या किसी को परास्त करना, वास्तव में जीत कहां है? आप जैसे हैं, वैसे ही खुश हैं, यह सफलता के असल मायने हैं। बस खेलते रहना जीत से कम बड़ी बात नहीं है। जीतने या हारने से ज्यादा अहमियत सक्षम बनने की है। सयाने बताते हैं कि जिंदगी जीने की जो सीख खेल-खेल में मिलती है, वह किसी से नहीं मिलती। सुबह की सैर और जिम में कसरत सेहत जरूर दुरुस्त रखते हैं, लेकिन खेलों जैसा चौतरफा व्यक्तित्व निखार नहीं ला पाते। हारना सिखाना ही खेलों की बड़ी खूबी है। जबकि कोई हारना नहीं चाहता, न ही किसी को हारना आता है। स्कूली और गली-मोहल्लों के खेलों में तो बचपन ही गुजरता है कि हारते जाओ, फिर भी खेलते जाओ। कोई कितना हारे, खेलने के मौके कम नहीं होते। खेलों की भांति जिंदगी में भी तमाम चुनौतियों से दो-चार होना पड़ता है- कुछ जीतते हैं, कुछ हारते हैं। जाने-माने उद्योगपति अज़ीम प्रेमजी बताते हैं, 'क...
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