विधानसभा चुनाव 2027: उप्र में सीटों के बंटवारे को लेकर सपा, कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज
(विद्या शंकर राय)लखनऊ, 18 जुलाई (वार्ता) उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के गठबंधन की चर्चाओं के बीच दोनों पार्टियों के नेताओं ने सीटों के बंटवारे को लेकर बयानबाजी तेज कर दी है जिसे गठबंधन की वार्ता में दोनों ओर से दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
कांग्रेस का कहना है कि गठबंधन में उसे सम्मान और बराबरी की हिस्सेदारी मिलनी चाहिए, जबकि सपा का रुख है कि सीटों का बंटवारा दलों की जीतने की क्षमता के आधार पर होना चाहिए।
प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा के आम चुनाव करीब छह-सात महीने का समय रह गया है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि उनकी पार्टी सपा के साथ गठबंधन में करीब 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी के साथ बराबरी का भागीदार रहना चाहती है।
सपा नेतृत्व सीटों की संख्या पर खुलकर कुछ नहीं कह रहा लेकिन पार्टी के नेताओं का कहना है कि गठबंधन में सीटों के तालमेल का आधार जीत की संभावना होनी चाहिए और इस आधार पर कांग्रेस के नेताओं का 200 सीटों के लिए दावा अव्यावहारिक है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने स्पष्ट कहा है कि उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव सपा के साथ गठबंधन में समानता और बराबरी के भागीदार के रूप में लड़ना चाहेगी। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि कांग्रेस इस बार गठबंधन में "छोटे भाई" की भूमिका स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है और सीट बंटवारे में बड़ी हिस्सेदारी चाहती है।
इसके विपरीत सपा नेताओं का तर्क है कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन के अंतर्गत कांग्रेस को 107 सीटें दी गई थीं लेकिन वह केवल सात सीटें ही जीत सकी थी, पर जब कांग्रेस ने 2022 में पिछला विधान सभा चुनाव चुनाव अकेले लड़ा तो उसे केवल दो सीटों पर ही जीत मिली। ऐसे में सपा नेताओं का तर्क है कि भाजपा को हराने के लिए सीटों की संख्या के बजाय जीतने की क्षमता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
इस बीच दोनों दलों के नेताओं के बयानों से तल्खी भी बढ़ी है। हाल ही में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा था कि 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा 120 सीटें भी नहीं जीत सकी थी, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद उसकी सीटों की संख्या बढ़कर 37 हो गई।
इसके जवाब में सपा के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन ने कहा है कि कुछ लोग अनावश्यक बयान देकर गठबंधन की मर्यादा भूल रहे हैं। उनका कहना है कि यदि गठबंधन को मजबूत रखना है तो सार्वजनिक रूप से संयम और सौहार्द बनाए रखना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने इमरान मसूद पर समय-समय पर मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों को लेकर सपा पर दबाव बनाने का भी आरोप लगाया।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सीट बंटवारे पर अंतिम निर्णय भले ही शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर हो, लेकिन फिलहाल दोनों दल अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत और मोलभाव की स्थिति मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं।

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