लंबे समय तक कब्जे में रहने से किसी सार्वजनिक संपत्ति पर अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता
प्रयागराज, (दिनेश तिवारी) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अलीगढ़ नगर निगम की भूमि पर बने आवासीय क्वार्टरों को खाली करने के मामले में याचिका खारिज कर दी।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बिना वैध दस्तावेज के केवल लंबे समय तक कब्जे में रहने से किसी सार्वजनिक संपत्ति पर कानूनी अधिकार स्थापित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने नगर आयुक्त के बेदखली संबंधी आदेश बरकरार रखा।
न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने यह आदेश दिया।
शफीकुर रहमान समेत सात लोगों ने याचिका दाखिल कर 15 मई 2026 को नगर आयुक्त की ओर से पारित आदेश और छह जून 2026 को जारी बेदखली नोटिस को चुनौती दी थी। नोटिस में अलीगढ़ के मौजा डोडपुर माफी स्थित नजूल प्लॉट संख्या 78 और 87 पर बने नगर निगम के आवासीय क्वार्टर खाली करने के निर्देश दिए गए थे।
याचियों का दावा था कि नगर निगम ने इन क्वार्टरों का निर्माण अपने कर्मचारियों के लिए कराया थाए लेकिन बाद में उनके पूर्वजों को खाली पड़े आवास किराये पर दिए गए थे। उनका कहना था कि वे नियमित रूप से किराया जमा करते रहे। नगर निगम के प्रस्ताव के अनुसार फ्रीहोल्ड के लिए मांगी गई राशि भी जमा कर दी थी। इसलिए उन्हें आवासों से बेदखल नहीं किया जा सकता।
दूसरी ओर नगर निगम ने अदालत में कहा कि याचियों के पास ऐसा कोई दस्तावेज नहीं हैए जिससे यह साबित हो सके कि उन्हें कभी विधिवत आवास आवंटित किया गया था या वे नगर निगम के अधिकृत किरायेदार हैं। याची अवैध कब्जाधारी हैं।
उच्च न्यायालय ने कहा कि याची कोई दस्तावेज पेश कियाए जिससे उनके कब्जे को वैध ठहराया जा सके। जिन रसीदों के आधार पर याची फ्रीहोल्ड का दावा कर रहे हैंए वे उनके पक्ष में कोई कानूनी अधिकार स्थापित नहीं करतीं। प्रस्तुत रसीदों से यह भी साबित नहीं होता कि नगर निगम ने उनसे किराया स्वीकार किया था। कोर्ट ने बेदखली नोटिस में हस्तक्षेप इन्कार कर दिया।
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