डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्र की एकता, अखंडता के प्रखर प्रहरी थे : पटेल


प्रयागराज, (दिनेश तिवारी)  भरतीय जनता पार्टी (भाजपा) उत्तर प्रदेश के नवनियुक्त प्रदेश महामंत्री दिलीप सिंह पटेल ने कहा कि डॉ  श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक अस्मिता के प्रखर प्रहरी थे।

   भाजपा यमुनापार द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती पखवाड़े के अंतर्गत गुरुवार को कोरांव में जिला कार्यकर्ता सम्मेलन में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक अस्मिता के प्रखर प्रहरी थे। उन्होंने सबसे पहले "एक देश, एक विधान, एक निशान और एक प्रधान" का विचार देश के सामने रखा, जो आज राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बन चुका है। 

    श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में धारा-370 एवं 35-ए को समाप्त कर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण रूप से देश की मुख्यधारा से जोड़ना डॉ. मुखर्जी के बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर रहे हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई एवं पारसी शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान कर प्रधानमंत्री ने डॉ. मुखर्जी के वर्षों पुराने संकल्प को साकार किया है। 

     उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों, सेवा भाव और संगठनात्मक मूल्यों को गांव-गांव तक पहुंचाकर विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

     इस अवसर पर  कोरांव विधायक राजमणि कोल ने "डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का केंद्रीय मंत्रिमंडल में योगदान" विषय पर कहा कि देश के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में उन्होंने आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव रखी। राष्ट्रहित उनके लिए सर्वोपरि था और उन्होंने सिद्धांतों की रक्षा के लिए मंत्री पद तक का त्याग कर दिया। उनका जीवन आज भी जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

       उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रवादी विचारधारा को सशक्त मंच देने के उद्देश्य से वर्ष 1951 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना की।  पंडित दीनदयाल उपाध्याय, नानाजी देशमुख, अटल बिहारी वाजपेयी सहित अनेक राष्ट्रनिष्ठ कार्यकर्ताओं के सहयोग से जनसंघ एक वैचारिक आंदोलन बना, जो आज भारतीय जनता पार्टी के रूप में विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन है।

     श्री कोल ने कहा कि  डॉ.  मुखर्जी का जीवन राष्ट्रभक्ति, संगठन, त्याग और वैचारिक प्रतिबद्धता का अनुपम उदाहरण है। प्रत्येक भाजपा कार्यकर्ता का दायित्व है कि वह उनके विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाते हुए सेवा, सुशासन और "राष्ट्र प्रथम" की भावना को और अधिक मजबूत बनाए।

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