छोटे उद्यमों को वैश्विक बाजार के अवसरों के तैयार करने के उद्येश्य से व्यावहारिक दिग्दर्शिका का प्रकाशन


नई दिल्ली, 16 जुलाई (वार्ता) भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) के व्यापार एवं निवेश कानून केंद्र (सीटीआईएल) ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के सहयोग से "गोइंग ग्लोबल: देश के सूक्ष्म, लघु तथा मझोले क्षेत्र के उद्यमों ( एमएसएमई) के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका" का प्रकाशन किया है। इस प्रकाशन का उद्देश्य एमएसएमई को सूचित व्यावसायिक निर्णय लेने में सक्षम बनाना तथा उन्हें अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अधिक प्रभावी भागीदारी के लिए तैयार करना है।

इसके लोकार्पण के लिए गुरुवार को यहां आयोजित कार्यक्रम सीआईआई के प्रतिनिधियों ने मार्गदर्शिका का परिचय प्रस्तुत करते हुए बताया कि इसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए एक समग्र एवं व्यावहारिक संसाधन के रूप में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य एमएसएमई को निर्यात के अवसरों की पहचान करने, विभिन्न देशों के बाजारों तक पहुंच संबंधी आवश्यकताओं को समझने, निःशुल्क उपलब्ध व्यापार संबंधी सूचना एवं विश्लेषण उपकरणों का उपयोग करने, अंतरराष्ट्रीय मानकों एवं सतत विकास संबंधी आवश्यकताओं का अनुपालन सुनिश्चित करने तथा निर्यात के लिए अपनी तैयारी को मजबूत बनाने में सहायता प्रदान करना है।
यह मार्गदर्शिका एमएसएमई क्षेत्र के समक्ष आने वाली सामान्य चुनौतियों, जैसे बाजार संबंधी जानकारी की सीमित उपलब्धता, विदेशी खरीदारों के बारे में अपर्याप्त जानकारी, अंतरराष्ट्रीय मानकों एवं प्रमाणन संबंधी आवश्यकताओं का अनुपालन करने में कठिनाई तथा मूल्य प्रतिस्पर्धा बनाए रखने जैसी समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करती है।
मार्गदर्शिका में बाजार विश्लेषण को सरल तरीके से समझाया गया है, मानकों एवं प्रमाणन प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई है, संभावित विदेशी खरीदारों की पहचान के उपाय बताए गए हैं तथा ऐसे विश्वसनीय और निःशुल्क उपलब्ध डिजिटल उपकरणों की जानकारी दी गई है, जिनके माध्यम से बाजार अनुसंधान की लागत कम की जा सकती है।
मार्गदर्शिका के लोकार्पण के बाद आयोजित एक पैनल चर्चा का संचालन सुमंत चौधुरी ने किया। चर्चा में सीटीआईएल के वरिष्ठ शोध फेलो ऋधीश राजवंशी, नीति अपैरल्स के प्रबंध निदेशक एवं फिस्मे (एफआईएसएमई) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अनिमेष सक्सेना, तथा अरैना ग्रुप के अध्यक्ष नलिन कोहली ने भाग लिया।
चर्चा में भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के अंतर्गत माल के उद्गम संबंधी नियमों तथा सहयोग तंत्रों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से भारतीय एमएसएमई के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

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