गुर्दे की पथरी के इलाज में कारगर एनबीआरआई द्वारा विकसित औषधि

लखनऊ 27 अक्टूबर (वार्ता) राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) ने गुर्दे की पथरी के उपचार के लिये आर्युवेदिक दवा विकसित की है। संस्थान का दावा है कि गुर्दे की पथरी के इलाज में दवा 80 फीसदी तक कारगर है।
संस्थान के 67वां वार्षिक दिवस के मौके पर जारी वार्षिक रिपोर्ट में प्रमुख उपलब्धियों का बखान किया गया। इस अवसर पर प्रो. जे. पी. खुराना, इंसा उपाध्यक्ष (अंतरराष्ट्रीय मामलें) और पूर्व प्रमुख, पादप आणुविक जैविकी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, दक्षिणी परिसर, नई दिल्ली, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। समारोह की अध्यक्षता डॉ शेखर सी मांडे, महानिदेशक, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और सचिव, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर), विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय रने की।
संस्थान के निदेशक प्रो एस के बारिक ने बताया कि संस्थान ने गुर्दे की पथरी के उपचार के लिये हर्बल उत्पाद एनबीआरआई यूरो 05 की प्रौद्योगिकी को मेसर्स मार्क लेबोरेटरी, लखनऊ को स्थानांतरित किया है। सीएसआईआर-एनबीआरआई द्वारा विकसित एनबीआरआई यूरो 05 यूरोलिथियासिस, नेफ्रोलिथियासिस और पोस्ट लिथोट्रिप्सी स्थितियों यानी एक्स्ट्रा कॉर्पोरल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी (ईएसडब्लूएल) की स्थितियों में सुधार के लिये एक सहक्रियात्मक हर्बल संयोजन है।
इस हर्बल उत्पाद के अवयवों के रूप में पाँच जड़ी-बूटियाँ सम्मिलित हैं जो देश भर में आसानी से उपलब्ध हैं। इसके प्रयोग से चूहों में रीनल कॉर्टेक्स (गुर्दे) की पथरियों के स्तर में 70 प्रतिशत कमी के साथ पथरियों की संख्या में 80 फीसदी की कमी देखी गई है। अन्य मौजूदा ब्रांडों की तुलना में यह उत्पाद कम खुराक में भी प्रभावी ढंग से काम करेगा। यह प्रोफिलैक्सिस और रोग पुनरावृत्ति की रोकथाम में भी प्रभावी है। इस हर्बल उत्पाद को विकसित करने वाली टीम में संस्थान के निदेशक प्रो. एसके बारिक, डॉ. शरद के श्रीवास्तव और डॉ. अंकिता मिश्रा, सीएसआईआर-आईआईटीआर के डॉ. विकास श्रीवास्तव, डॉ. धीरेंद्र सिंह और डॉ. हफीजुर्रहमान खान एवं केजीएमयू, लखनऊ से डॉ.एसएन संखवार एवंडॉ. सलिल टंडन शामिल है।
इस मौके पर मेसर्स मार्क लेबोरेटरीज के सीएमडी प्रेम किशोर ने कहा कि कंपनी शीघ्रातिशीघ इस हर्बल दवा को बाजार में उपलब्ध कराएगी।
संस्थान के निदेशक ने बताया कि इसके साथ-साथ सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत, मणिपुर में विभिन्न कृषि स्थितियों के लिएउच्च सीबीडी और कम साइकोट्रॉपिक यौगिकों वालीकैनबिस लाइनों के विकास एवं और इनसे औषधीय और प्रसाधन उत्पादों के विकास के लिये एक नई परियोजना की शुरुआत की गयी। परियोजना में मैसर्स इंडिका न्यूट्रास्युटिकल एलएलपी, नई दिल्ली इंडस्ट्री पार्टनर की तरह साथ में काम करेगी।
प्रोफेसर जेपी खुराना ने 'प्लांट विजन में आणुविक अंतर्दृष्टि' शीर्षक पर आधारित अपने वार्षिक दिवस व्याख्यान में पौधों के जीवन में प्रकाश के महत्व और पौधों के जीवन के विभिन्न विकास चरणों को विनियमित करने में प्रकाश की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने प्रकाश संकेतनमें शामिल जटिल आणुविकढांचे में फाइटोक्रोमेस और क्रिप्टोक्रोम की भूमिका को स्पष्ट किया।
अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ. एस. सी. मांडे ने वार्षिक दिवस पर सीएसआईआर-एनबीआरआई वैज्ञानिकों एवं अन्य कर्मचारियों को बधाई दी और मुख्यतःनवीनकिस्मों के विकास के साथ सीएसआईआर-एनबीआरआई के हालिया शोध और विकास गतिविधियों की सराहना की और वैज्ञानिकों को आम जनमानस तक पहुँचने वाले शोध कार्योंके लिए बधाई दी।
प्रदीप
वार्ता


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