शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद केस में अदालत का फैसला सुरक्षित, अगले आदेश तक गिरफ्तारी पर रोक


प्रयागराज,( दिनेश तिवारी) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दर्ज यौन उत्पीड़न मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।

 न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया है| अदालत के आदेश के तहत अगली सुनवाई तक उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम संरक्षण प्रदान किया गया है।

उच्च न्यायालय में शंकराचार्य का पक्ष वकील  पी एन मिश्र ने रखा जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल पेश हुए | शिकायतकर्ता  आशुतोष महाराज कि वकील ऋण सिंह ने भी दलीले राखी | अब मार्च के तीसरे हपते मे केस कि सुनवाई होगी |

अपर महाधिवक्ता ने याचिका पोषणीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे उच्च न्यायालय नहीं आ सकते। उन्होने उच्चतम न्यायालय के कई फैसलों का हवाला दिया।

शंकराचार्य के वकील  पी एन मिश्र ने कहा पीड़ित का मुकदमा संरक्षक के जरिए दर्ज कराया है। उसके माता.पिता और अभिभावकों का कोई पता नहीं है। सरकार ने कहा कि असाधारण हालात में ही अग्रिम जमानत सीधे उच्च न्यायालय आ सकती है। इस मामले में असाधारण जैसा कुछ नहीं है। इस पर न्यायालय ने कहा कि यह कोई अनिवार्य बाधा नहीं है।

शंकराचार्य के वकील ने कहा कि उनके खिलाफ पहले 18 जनवरी को अमावस्या के दिन हुई मारपीट की अर्जी दी गई। इस पर केस दर्ज नहीं हुआ तो पॉक्सो वाली अर्जी दाखिल कर दी गई। यह दो अर्जी ही आपस में भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है। यह मामला साजिश के तहत दर्ज कराया गया है , जो किसी के दबाव की ओर ईशारा कर रहा है।

वकील  पी एन मिश्र ने कहा कि शंकराचार्य पर केस दर्ज कराने वाला खुद हिस्ट्रीशीटर है। उसके ऊपर गौ हत्या , दुष्कर्म , हत्या का केस दर्ज है। वह 25 हजार रुपये का इनामी है। नाबालिगों को अब तक बाल कल्याण समिति को क्यों नहीं सौंपा गया। बच्चों के मां.बाप कहां हैं। इस पर न्यायालय ने सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि बच्चे कहां हैं।

शंकराचार्य के अधिवक्ता ने विवेचना पर ही सवाल खड़ा किए। कहा कि जिन बच्चों को पेश किया गया है उनकी मार्कशीट हरदोई की है और वहां के वह संस्थागत छात्र हैं। शंकराचार्य से विवाद मौनी अमावस्या से शुरू हुआ है। आरोप लगाया कि यह सब सरकारी की ओर से प्रायोजित है। बच्चों का मेडिकल करीब एक माह बाद हुआ है। सरकार ने बताया कि बच्चों को बाल कल्याण समिति ने उनके माता पिता को सौंपा है।

इससे पहले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सुनवाई पर कहा कि झूठ की कलई अदालत में खुल जाएगी। अदालत पर भरोसा जताते हुए शंकराचार्य ने कहा कि कब तक झूठ की कहानी बनाकर बरगलाएंगे। उत्तर प्रदेश की पुलिस भी उनको संरक्षण दे रही है। बच्चों के साथ कुकर्म की मेडिकल रिपोर्ट किसकी है, उन बच्चों के साथ कुकर्म किसने की है , यह साबित तो उनको करना होगा। पुलिस अपने मुताबिक जांच कर रिपोर्ट भी लगा रही है।

गौरतलब है कि तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी  ने 173 (4) के तहत जिला अदालत मे याचिका दाखिल कि थी | जज (रेप एण्ड पॉक्सो स्पेशल कोर्ट) विनोद कुमार चौरसिया के आदेश के बाद झूसी थाने कि पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ यौन शोषण की एफआईआर दर्ज की थी |

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